जोधपुर के पूर्व महाराजा गज सिंह: मारवाड़ की आत्मा से गहराई से जुड़े ‘बापजी’

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पश्चिमी राजस्थान की सामाजिक और राजनीतिक चेतना पर जोधपुर और उसके शाही वंश की विरासत का गहरा प्रभाव रहा है। इस विरासत में एक नाम सबसे प्रमुख रूप से सामने आता है – ‘बापजी’ महाराजा गज सिंह

गज सिंह मात्र चार साल की उम्र में ही जोधपुर के राजा बने, जब उनके पिता की एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई। उस समय उन्हें जोधपुर का शासक घोषित किया गया।

सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव

गज सिंह राजनेता नहीं हैं, लेकिन हर चुनाव में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसका कारण है उनका गहरा सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव। मारवाड़ की आत्मा से उनका रिश्ता इतना गहरा है कि लोग उन्हें आज भी सम्मानपूर्वक ‘बापजी’ कहकर पुकारते हैं।

विरासत का दबदबा

जोधपुर का शाही वंश न केवल इतिहास और संस्कृति में बल्कि आज भी सामाजिक चेतना में प्रभावशाली है। गज सिंह की छवि इस विरासत का जीवंत प्रतीक है।

निष्कर्ष

महाराजा गज सिंह की कहानी केवल शाही वंश की परंपरा नहीं है, बल्कि यह मारवाड़ की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा है। उनकी गैर-राजनीतिक भूमिका भी चुनावी माहौल में असर डालती है, जो उनके व्यक्तित्व और विरासत की ताकत को दर्शाती है।

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