जम्मू में सरकारी एमआरआइ मशीन बंद, मरीजों की जांच के लिए निजी अस्पतालों से अनुबंध
जम्मू संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट गहराता जा रहा है। पहले से ही तीन प्रमुख अस्पतालों की सीटी स्कैन मशीनें खराब पड़ी हैं और अब संभाग की एकमात्र सरकारी एमआरआइ मशीन भी कई दिन पहले बंद हो चुकी है। अनुमान है कि इस मशीन की मरम्मत में एक माह से अधिक का समय लग सकता है।
बड़ी संख्या में मरीजों को हो रही परेशानी को देखते हुए जीएमसी प्रशासन ने चार निजी अस्पतालों और नैदानिक केंद्रों से अनुबंध किया है, ताकि मरीजों की जांच जारी रह सके। राहत की बात यह है कि इन केंद्रों पर भी मरीजों से सरकारी शुल्क ही लिया जाएगा, निजी दरें नहीं।
जम्मू संभाग में एमआरआइ की स्थिति
जम्मू संभाग के पांच मेडिकल कॉलेजों में से केवल जीएमसी जम्मू में ही एमआरआइ मशीन उपलब्ध है। बीते वर्ष मेडिकल कॉलेज कठुआ के लिए एमआरआइ मशीन खरीदने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन अब तक खरीद प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।
इस वजह से पूरे जम्मू संभाग के मरीजों को एमआरआइ जांच के लिए केवल जीएमसी जम्मू पर निर्भर रहना पड़ता है। यहां पहले दो मशीनें थीं—एक मशीन 20 वर्ष पुरानी थी जो पहले से ही खराब है, जबकि दूसरी मशीन हाल ही में बंद हो गई है।
मरीजों की बढ़ती मुश्किलें
मरीजों को जांच के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई गंभीर रोगियों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि प्रशासन द्वारा किए गए नए अनुबंध से उम्मीद है कि जांच की प्रक्रिया कुछ हद तक सुचारु हो सकेगी।
निष्कर्ष
जम्मू संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि आधुनिक उपकरणों की कमी और पुरानी मशीनों पर निर्भरता मरीजों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। प्रशासन की ओर से निजी अस्पतालों से अनुबंध करना फिलहाल राहत का कदम है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए नई मशीनों की खरीद और समय पर रखरखाव बेहद जरूरी है।


