सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस में शामिल हुए भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए विधानसभा के स्पीकर को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एजी मसीह उपस्थित थे। पीठ के समक्ष विधानसभा स्पीकर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी और मुकुल रोहतगी ने जानकारी दी कि अब तक कुल सात मामलों में आदेश सुनाया जा चुका है, जबकि एक मामले में अदालत ने आदेश सुरक्षित रखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि विधानसभा स्पीकर की रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्यवाही और अंतिम निर्णय लिया जाएगा। न्यायालय ने इस पर जोर दिया कि विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं का निपटारा संविधान और दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों के अनुसार होना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की इस निर्देशात्मक कार्रवाई से यह सुनिश्चित होगा कि राजनीतिक दलबदल और विधायक सदस्यता से जुड़े मामले पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से निपटाए जाएं। इस निर्णय से विधानसभा की सदस्यता विवादों पर भी असर पड़ सकता है और विधायकों के खिलाफ याचिकाओं का कानूनी मार्ग स्पष्ट होगा।
सुप्रीम कोर्ट की इस नोटिस के बाद विधानसभा स्पीकर को अब दो सप्ताह के भीतर पूरी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी, जिसमें बीआरएस विधायकों के राजनीतिक कदम, पार्टी परिवर्तन और संबंधित अयोग्यता याचिकाओं की स्थिति का विवरण शामिल होना अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही अदालत आगे की कार्रवाई का निर्धारण करेगी और आवश्यक होने पर अगली सुनवाई की तिथि तय की जाएगी।
यह मामला तेलंगाना की राजनीतिक स्थिरता और विधानसभा कार्यवाही की पारदर्शिता के लिए अहम माना जा रहा है।


