देश की वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रक्षा खरीद बोर्ड (डीपीबी) ने फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, अब इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) के सामने पेश किया जाएगा। इसके बाद इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS-SEC) से अंतिम स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायु सेना ने पिछले वर्ष रक्षा मंत्रालय को 114 राफेल विमानों की आवश्यकता के संबंध में औपचारिक प्रस्ताव सौंपा था। इस सौदे पर अगले महीने तक भारत और फ्रांस के बीच अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
यह सौदा अंतर-सरकारी समझौते (जी-टू-जी) के तहत होगा, जिससे बिचौलियों को हटाकर सीधे खरीद और पारदर्शी डिलीवरी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी। इस प्रकार, राफेल विमानों की खरीद भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।
राफेल विमानों की तैनाती से भारतीय वायु सेना के हवाई बल और हवाई जवाबी कार्रवाई की क्षमता में इजाफा होगा। यह कदम भारत की सुरक्षा नीति को और मजबूती प्रदान करेगा, विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर बढ़ते सुरक्षा खतरे के मद्देनजर।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस सौदे से भारत की फाइटर जेट बेड़े की आधुनिकीकरण प्रक्रिया तेजी से पूरी होगी और वायु शक्ति की अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तुलना संभव होगी।


