महज 15 साल की उम्र में टेलीविजन की दुनिया में कदम रखने वाली अभिनेत्री अपरा मेहता ने ‘एक महल हो सपनों का’ और ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ जैसे सुपरहिट धारावाहिकों के जरिए घर-घर पहचान बनाई। करीब चार दशकों के अपने करियर में उन्होंने टीवी इंडस्ट्री के बदलते दौर को बेहद करीब से देखा है।
इन दिनों अपरा मेहता सन नियो चैनल पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक ‘प्रथाओं की ओढ़े चुनरी : बीदणी’ में राजश्री बुआ की भूमिका निभा रही हैं। इस खास किरदार, अपने सफर और टेलीविजन की मौजूदा चुनौतियों पर उन्होंने खुलकर बातचीत की।
चार में से एक को चुना
अपने नए शो को लेकर अपरा मेहता कहती हैं,
“पिछले साल मैं कुछ महीनों के लिए अपने गुजराती नाटक के सिलसिले में अमेरिका गई थी। वहां से लौटने के बाद मैंने हंसल मेहता की एक वेब सीरीज की शूटिंग की। उसी दौरान मेरे पास टेलीविजन के कई ऑफर आए।”
वह आगे बताती हैं,
“इनमें से चार ऑफर मुझे वाकई अच्छे लगे। लेकिन उनमें से तीन प्रोजेक्ट्स को शुरू होने में समय लग रहा था, इसलिए मैंने ‘प्रथाओं की ओढ़े चुनरी : बीदणी’ को करने का फैसला किया।”
अपने किरदार को लेकर अपरा कहती हैं कि राजश्री बुआ का रोल उन्हें इसलिए खास लगा क्योंकि इसमें राजस्थानी बोली, संवादों की शैली और लुक बिल्कुल अलग है।
“इस तरह का किरदार मैंने पहले कभी नहीं निभाया था, यही बात मुझे इस शो की ओर खींच लाई,” अपरा बताती हैं।


