सिंगरौली। सोमवार की दोपहर करीबन 1 बजे दूधिचुआ परियोजना के CHP के क्रेशर नंबर 3 के एसएस 4 में एक बहुत ही दुखद दुर्घटना घटित हुई जिस दुर्घटना में एक NCL कर्मी को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस दुर्घटना को लेकर स्थानीय नेताओं ने प्रबंधन पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया। तो प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारी जांच के बाद मामले में कोई भी प्रतिक्रिया देने को बोल रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार NCL की दूधिचूआ परियोजना के CHP के क्रेशर नंबर 3 के ss4 में NCL कर्मी रामसजीवन वैंस पीसी मशीन की की सहायता से काम करवा रहे थे इस दौरान पिछले कई वर्षों से खराब पड़े रॉक ब्रेकर मशीन में पीसी मशीन का कोई हिस्सा टकरा गया जिसके वजह से रॉक ब्रेकर मशीन का ऊपरी हिस्सा उनके सर पर गिर गया। जिस घटना में रामसजीवन बैंस घायल हो गए। स्थानीय नेताओं ने बताया कि चोट लगने के बाद आनन-फ़ानन में रामसजीवन बैंस को नेहरू चिकित्सालय ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सूत्र बताते हैं कि रामसजीवन की मौत के बाद एनसीएल दूधीचूआ के जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने करतूत को छुपाने हेतु तुरंत ही CHP के क्रेशर नंबर 3 के ss4 से सबूत मिटाने की कोशिश में लग गए। बताया जा रहा है कि परियोजना के जिम्मेदार अधिकारी उक्त मामले में डीजीएमएस को मैनेज करने में लगे हुए हैं आब देखना यह है कि क्या डीएमएस निष्पक्ष का तरीका से उक्त मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है? या प्रबंधन के इशारों पर रिपोर्ट तैयार करता है?
आखिर क्यों पीसी मशीन से करवाई जा रही थी कार्य?
ऐसे में एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि दूधीचूआ परियोजना के CHP के क्रेशर नंबर 3 के ss4 में लगे रॉक ब्रेकर मशीन पिछले कई सालों से आखिर खराब क्यों पड़ा हुआ है? क्या प्रबंधन बड़ी दुर्घटना घटित होने का इंतजार कर रहा था? या यह मशीन भी परियोजना के घोटाले की भेंट चढ़ गया है तभी तो परियोजना ने उक्त जगह पर पीसी मशीन से कार्य करवाना उचित समझा?
मंगलवार की सुबह से ही पुलिस की देख रेख में मृतक रामसजीवन बैंस शव का पोस्टमार्टम कराया गया वही परियोजना के कुछ श्रमिक नेताओं हस्तक्षेप के बाद मृतक के बड़े पुत्र को जॉइनिंग लेटर एवं लगभग 25 लाख के सहायता राशि प्रबंधन द्वारा दी गई।
इनका कहना है:
दुर्घटना कैसे घटित हुआ है यह कहां पाना अभी मुश्किल है हम जांच के बाद ही कुछ बता पाएंगे।
प्रदीप कुमार त्रिपाठी (परियोजना अधिकारी, दूधिचूआ)
रामसजीवन बैंस मैकेनिकल फिटर के पद पर पदस्थ थे सीएचपी तीन नंबर के पास उन्हें कम पर बुलाया गया था पता चला है कि किसी घटना से उनकी मौत हो गई है। हम और हमारी टीम ने मौके का परीक्षण किया परीक्षण से पता चला कि वहां पर लापरवाही बरती गई है वहां लंबे समय से मशीन ब्रेकडाउन पड़ी हुई है और जो काम उस मशीन का था उस जगह पर उसी काम को पीसी मशीन द्वारा कराया जा रहा था इस कारण से यह घटना घटी है।
अशोक कुमार धारी (कोलफील्ड मजदूर यूनियन, दूधिचूआ)
हम लोगों को 2 बजे के लगभग सूचना मिली के सीएचपी के क्रेशर नंबर 3 के पास एक एंप्लॉय को गंभीर रूप से चोट लगा है जिनका इलाज के लिए नेहरू चिकित्सालय ले जाया गया है जहां उनकी मौत हो गई है इसके बाद हम सभी लोग घटनास्थल पर गए। मौके पर देखा गया कि क्रेशर नंबर 3 जहां पर कोयला अनलोड होता है वहां पर बड़े-बड़े कोयले को तोड़ने के लिए रॉक ब्रेकर मशीन लगा होता है पता किया तो पता चला कि रख ब्रेकर मशीन विगत कई वर्षों से ब्रेकडाउन पड़ा हुआ है कभी-कभी रिसीविंग पीट में बड़े-बड़े बॉर्डर आ जाते हैं तो जाम हो जाता है तो उसे जाम को क्लियर करने के लिए पैसे मशीन द्वारा क्लियर कराया जा रहा था और रख ब्रेकर मशीन का इंड वाला बुम दूसरे साइड में टेक करके रखा गया था और वही पर रामसजीवन बैंस खड़े होकर काम करवा रहे थे घटना स्थल को देखने के बाद लग रहा ही की बुम के जस्ट नीचे खून और मास का लोथड़ा पड़ा हुआ है और वह से 4-5 फीट पुर भी मास और खून के निशान पड़े हुए हैं।
राम प्रकाश मौर्या (सेफ्टी बोर्ड मेंबर ,NCL)
कोई ऐसा चीज वहां प्रतीत नहीं हो रहा है कि इसके हिट की वजह से या इसकी असुरक्षा के कारण यह घटना हुई है संजोग कहिए जोग कहिए उसको हम लोग अपने स्तर से देख रहे हैं कि कहां हमसे चूक हुई है की फ्यूचर में ऐसी घटनाएं ना हो। और जहां तक हो रहा है सभी प्रकार के बेनिफिट एवं एडवांटेज दिलवाने का प्रयास करेंगे।
राजेश मणि त्रिपाठी (अध्यक्ष सीएमएस, दुधिचूआ)
नोट: अगर आप इस मामले में वीडियो रिर्पोट देखना चाहते हैं तो आप हमारे यूट्यूब चैनल को देखें..


