डीआरडीओ ने तीसरी पीढ़ी की MPATGM मिसाइल का सफल परीक्षण किया

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रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करते हुए तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फारगेट मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का सफल परीक्षण किया है। इस अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली ने परीक्षण के दौरान एक चलते हुए लक्ष्य को सटीक रूप से नष्ट कर अपनी प्रभावशीलता साबित की।

यह परीक्षण रविवार को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर स्थित एक फायरिंग रेंज में किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह मिसाइल प्रणाली आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है और इसमें “टॉप अटैक क्षमता” मौजूद है, जिससे यह दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों को ऊपर से निशाना बनाकर अधिक प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर सकती है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम उपलब्धि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर डीआरडीओ और इससे जुड़े उद्योग भागीदारों को बधाई दी है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वदेशी तकनीक से विकसित ऐसी हथियार प्रणालियां न केवल भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करेंगी, बल्कि भविष्य में आयात पर निर्भरता भी कम करेंगी।

भारतीय सेना में शामिल होने की दिशा में कदम

डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी. कामत ने भी इस सफलता पर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस सफल परीक्षण के साथ ही MPATGM को भारतीय सेना में शामिल करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह मिसाइल प्रणाली सेना को आधुनिक और घातक एंटी-टैंक क्षमता प्रदान करेगी।

क्या है MPATGM की खासियत

MPATGM एक तीसरी पीढ़ी की एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है, जिसे खास तौर पर पैदल सेना के उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है। “फायर एंड फारगेट” तकनीक के तहत लॉन्च के बाद इसे लक्ष्य को ट्रैक करने के लिए ऑपरेटर की आवश्यकता नहीं होती। इससे युद्ध के मैदान में सैनिकों की सुरक्षा बढ़ती है और ऑपरेशन की सफलता की संभावना भी अधिक होती है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल भारत की मौजूदा और भविष्य की रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है। खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों और उच्च जोखिम वाले युद्ध परिदृश्यों में यह प्रणाली भारतीय सेना के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

रणनीतिक दृष्टि से अहम परीक्षण

रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि परीक्षण के दौरान मिसाइल ने सभी मानकों पर अपेक्षित प्रदर्शन किया। चलते लक्ष्य को सफलतापूर्वक नष्ट करना इस बात का संकेत है कि यह हथियार प्रणाली आधुनिक टैंक और बख्तरबंद वाहनों से निपटने में सक्षम है।

इस सफल परीक्षण के साथ भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वह स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है और भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है।

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