भारतीय संसद को लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से चुने गए जनता के प्रतिनिधि एक साथ बैठते हैं। भारत की विविधता के कारण, सांसद अलग-अलग संस्कृति, भाषा और क्षेत्र से आते हैं, जिससे कभी-कभी सदन की कार्यवाही समझने में मुश्किल होती है।
अब इस चुनौती का समाधान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से खोज लिया गया है। संसद में भाषा संबंधी सभी समस्याओं को दूर करने के लिए नई तकनीक लागू की जा रही है। पहले से ही संसद में 22 भाषाओं में अनुवाद की सुविधा उपलब्ध है, अब केंद्र सरकार ने 22 भाषाओं में परिपत्र जारी करने का निर्णय भी लिया है।
इस बदलाव से सांसदों को कई फायदे होंगे। वे अपनी मातृभाषा में सवाल पूछ सकेंगे और विधेयक या संसदीय समिति की रिपोर्ट भी अपनी भाषा में प्राप्त कर सकेंगे। इससे अनुवाद के बाद होने वाली गलतफहमियों और दिक्कतों से छुटकारा मिलेगा और संसद की कार्यवाही अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम लोकतंत्र की गहन समझ और सांसदों की कार्यक्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

