हर वर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती (Swami Vivekananda Jayanti 2026) मनाई जाती है। यह दिन सिर्फ एक महान संन्यासी की स्मृति से जुड़ा नहीं है, बल्कि उस विचारधारा को समझने का अवसर भी है, जिसने भारत को आत्मगौरव और आत्मविश्वास से भर दिया। 12 जनवरी 1863 को जन्मे स्वामी विवेकानंद का संपूर्ण जीवन आत्मबोध, साधना और सेवा का जीवंत प्रतीक रहा।
स्वामी विवेकानंद का मानना था कि आध्यात्मिकता केवल व्यक्तिगत मुक्ति तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य समाज और राष्ट्र के उत्थान से भी जुड़ा होना चाहिए। वे बार-बार इस बात पर जोर देते थे कि मनुष्य के भीतर असीम शक्ति निहित है और उस शक्ति की पहचान ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य है।
उनके विचारों में आध्यात्मिकता जीवन से पलायन नहीं, बल्कि जीवन को सशक्त, सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण बनाने का माध्यम है। यही वजह है कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और विशेष रूप से युवाओं को निरंतर प्रेरित करते हैं। राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) के रूप में मनाई जाने वाली यह जयंती नई पीढ़ी को आत्मनिर्भरता, साहस और सेवा भाव का संदेश देती है।

