मकर संक्रांति के अवसर पर लालू प्रसाद यादव के आवास पर हर साल आयोजित होने वाला दही-चूड़ा भोज इस बार चुनावी हार और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण अनिश्चितता में है।
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दोनों अभी तक बिहार नहीं पहुंचे हैं। इस वजह से यह स्पष्ट नहीं है कि इस बार परंपरागत भोज का आयोजन होगा या नहीं।
हालांकि, इस बार लालू प्रसाद यादव के बड़े पुत्र और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने इस आयोजन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने इस बार दही-चूड़ा भोज आयोजित करने का ऐलान किया है, जिससे न सिर्फ परंपरा कायम रहेगी बल्कि राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ने की संभावना है।
राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि इस ऐलान से बिहार की सियासी हलचल पर भी असर पड़ेगा। तेज प्रताप यादव के इस कदम से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह और जोश देखने को मिलेगा। वहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है कि लालू और तेजस्वी का इस आयोजन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होना तय है या नहीं।
पार्टी की करारी हार के बाद भी इस तरह के आयोजनों के जरिए राजद और जनशक्ति जनता दल की राजनीतिक सक्रियता बनाए रखने की रणनीति स्पष्ट दिखाई देती है। मकर संक्रांति पर होने वाले इस दही-चूड़ा भोज का आयोजन अब राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी अहम बन गया है।

