जम्मू में अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की लगातार बढ़ती संख्या सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के पास इनकी वास्तविक संख्या और पहचान को लेकर ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है, जिससे इलाके में सुरक्षा संबंधी सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, जम्मू में चोरी-छिपे रह रहे रोहिंग्या नागरिकों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है। कई ऐसे नागरिक संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से जुड़े पहचान पत्र दिखाकर शहर के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं। इससे प्रशासन की निगरानी और स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यदि इन लोगों के ठिकानों और वास्तविक आंकड़ों का पता नहीं चला, तो यह सांप्रदायिक और सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा कर सकता है। प्रशासन फिलहाल स्थिति का आकलन करने और कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए अंतर्जातीय सर्वे और पहचान अभियान शुरू करने की योजना बना रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जम्मू जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए सख्त निगरानी और डेटा संग्रह बेहद जरूरी है, ताकि सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियों से निपटा जा सके।

