डिजिटल लत पर लगेगा लगाम, सीएम की पहल से होगा छात्रों का सर्वांगीण विकास

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आज के डिजिटल युग में जहां बच्चे मोबाइल की दुनिया में अधिक उलझते जा रहे हैं, वहीं प्रदेश सरकार द्वारा विद्यालयों में पुस्तकों के पठन-पाठन व समाचार पत्र वाचन को बढ़ावा देने की पहल एक सकारात्मक व दूरदर्शी कदम साबित होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विद्यालयों में समाचार पत्रों की नियमित उपलब्धता और प्रार्थना सभा के दौरान समाचार वाचन जैसी गतिविधियां छात्रों को समसामयिक घटनाओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी।

इससे न केवल विद्यार्थियों की शब्दावली, भाषा और वर्तनी में सुधार होगा, बल्कि उनकी तार्किक सोच, अभिव्यक्ति क्षमता और सामाजिक समझ भी विकसित होगी। शिक्षकों, प्रबंधकों और अभिभावकों का मानना है कि यह पहल बच्चों को मोबाइल की लत से दूर कर पठन संस्कृति की ओर प्रेरित करेगी। आज के दौर में समाचार पत्र और पुस्तकों का अध्ययन छात्रों को जागरूक, आत्मनिर्भर और विवेकशील नागरिक बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

आजकल बच्चों को मोबाइल की एक बुरी लत लग चुकी है। ऐसे में छात्र यदि नियमित समाचार पत्र पढ़ते हैं तो, उनकी शब्दकोश समृद्ध होगा। शब्दों की संख्या बढ़ेगी और वर्तनी शुद्ध होगी। पिछले सप्ताह अपर मुख्य सचिव का जनपद में दौरा हुआ था, जिसमें उन्होंने कई विद्यालयों की लाइब्रेरी का निरीक्षण किया। उन्होंने लाइब्रेरी में समाचार पत्र की उपलब्धता पर विद्यालय की सराहना करते हुए सभी शिक्षकों का उत्साहवर्धन किया था और अनिवार्य रूप से इसकी उपलब्धता सुनिश्चित कराने को कहा था। इसी क्रम में मुख्यमंत्री की यह पहल बच्चों के बौद्धिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। -डा.विश्व प्रकाश सिंह, प्रधानाचार्य, पीएमश्री राजकीय जुबिली इंटर कालेज

विद्यालयों में विद्यार्थियों केे समाचार पत्र पढ़ना अनिवार्य किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल सराहनीय व प्रशंसनीय है। इससे छात्रों को वर्तमान परिवेश से जुड़ने में मदद मिलेगी। प्रार्थना के बाद समाचार वाचन से बच्चे देश-विदेश की घटनाओं से परिचित होंगे और इसके माध्यम से उनके अंदर बेहतर सूचना प्राप्त करने की ललक बढ़ेगी। वाचनालय में सभी हिंदी एवं अंग्रेजी समाचार पत्र तथा हमारे इतिहास एवं सनातन संस्कारों से संबंधित पुस्तकों को रखा जाना चाहिए। समाचार पत्र और किताबें पढ़ने से छात्रों में ज्ञान के दायरे का विस्तार होगा। साथ ही सामाजिक परिवेश को समझने में सुलभता होगी।

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