कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों से 2026 में भारत-पाक टकराव की आशंका, अमेरिकी विशेषज्ञों ने जताया युद्ध का खतरा

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अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट ‘कॉन्फ्लिक्ट्स टू वॉच इन 2026’ में चेतावनी दी है किकश्मीर और पीओके में बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच 2026 में सशस्त्र संघर्ष की ‘मध्यम संभावना’ है।

रिपोर्ट अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञों के सर्वे पर आधारित है और इसमें इस संघर्ष को अमेरिकी हितों पर ‘मध्यम प्रभाव’ वाला बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल मई में पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद हुआ संक्षिप्त सैन्य टकराव (ऑपरेशन सिंदूर) और उसके बाद दोनों देशों में सैन्य तैयारी बढ़ने से तनाव बना हुआ है।

सीएफआर ने नोट किया कि ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में भारत-पाकिस्तान सहित कई संघर्षों को समाप्त करने के प्रयास किए गए, लेकिन कश्मीर में आतंकवाद और दमन के कारण स्थिति नाजुक बनी हुई है।

2025 में अप्रैल में पहलगाम में हुए घातक हमले में 26 नागरिक मारे गए थे, जिसके जवाब में भारत ने 6-7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस दौरान पाकिस्तान स्थित 9 आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया गया और 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।

पाकिस्तान ने ड्रोन हमलों से जवाब दिया, लेकिन भारतीय सेना ने सभी घुसपैठों को नाकाम कर दिया। 10 मई को दोनों देशों के डीजीएमओ स्तर पर संपर्क के बाद सीजफायर हुआ।

रिपोर्ट में अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच भी ‘मध्यम संभावना’ वाला संघर्ष बताया गया है, जो टीटीपी जैसे सीमा-पार हमलों से ट्रिगर हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की आतंकवाद नीति क्षेत्रीय अस्थिरता का मुख्य कारण बनी हुई है।

विशेषज्ञों का सर्वे बताता है कि दुनिया 2026 में अधिक हिंसक हो सकती है, और दक्षिण एशिया इसके केंद्र में है। CFR ने अमेरिकी नीति निर्माताओं को सलाह दी है कि इन संघर्षों पर नजर रखें, क्योंकि ये क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।

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