मानव-वन्यजीव संघर्ष नियंत्रित करना सर्वोच्च प्राथमिकता: वन मंत्री; वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के दिए निर्देश

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मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए वन मंत्री डा. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि इसे नियंत्रित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। वन मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि संघर्ष को रोकने के लिए चेनलिंक फेंसिंग व चार रेस्क्यू सेंटरों का निर्माण शीघ्र पूरा किया जाए। पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत देने के निर्देश दिए।

वन मंत्री ने बहराइच, लखीमपुर खीरी, बलरामपुर और बिजनौर में बाघ, तेंदुए व भेड़ियों के हमलों में मृत हुए लोगों के स्वजन के प्रति संवेदना व्यक्त की। घायलों के उपचार और मुआवजा वितरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने, ग्रामीणों को जागरूक कर सहयोग प्राप्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने वन्यजीवों के व्यवहार में आ रहे परिवर्तनों पर शोध कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने और सभी जगह पशु चिकित्सकों की तैनाती शीघ्र सुनिश्चित करने को कहा है।

वन मंत्री ने अतिक्रमण हटाओ अभियान की भी समीक्षा की। वन क्षेत्र के बाहर अवैध कटान व वन्यजीवों के अवैध शिकार के विरुद्ध और सख्ती बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने दुधवा टाइगर रिजर्व, पलिया-खीरी के किशनपुर वन्यजीव विहार पर्यटन मार्ग पर वन मार्ग संख्या-23 के नवीन पर्यटन प्रवेश द्वार का आनलाइन उद्घाटन किया।

अगले वर्ष होने वाले पौधारोपण अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि लक्ष्य के अनुरूप उच्च गुणवत्ता की पौधे तैयार किए जाएं। मथुरा वन प्रभाग में असफल पौधारोपण पर अप्रसन्नता जताते हुए दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा उच्चाधिकारियों से निगरानी कराने के निर्देश भी दिए।

मंत्री ने महावीर स्वामी वन्यजीव विहार, ललितपुर में दो फरवरी को विश्व वेटलैंड दिवस कार्यक्रम, 29 जनवरी को कृषि वानिकी कार्यशाला तथा चार मार्च को मानव-वन्यजीव संघर्ष पर कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश दिए।

बैठक में बिजनौर में मानव-तेंदुआ संघर्ष पर रूहेलखंड जोन द्वारा तैयार रणनीति का प्रस्तुतीकरण भी किया गया। इस मौके पर प्रमुख सचिव अनिल कुमार व प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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