महोबा में 40 करोड़ के घोटाले के बाद प्रशासन की सख्ती, बांदा में खंगाले जाएंगे फसल बीमा योजना के लाभार्थी किसानों के खाते

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 प्रधानमंत्री फसल बीमा में खेल कर महोबा में हुई धांधली को लेकर जिले भर के इस योजना से जुड़े करीब दो लाख किसानों के खाते खंगाले जाएंगे। इसमें निदेशालय से कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश मिले हुए हैं।

कृषि व राजस्व विभाग की संयुक्त टीम का गठन किया जा रहा है। जो बीते व इस वर्ष में किसानों के प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में मिले मुआवजे को लेकर सघन जांच करेगी। किसानों के खाते से लेकर उसकी खतौनी, आधार कार्ड आदि का मिलान किया जाएगा।

विभिन्न पहलुओं पर जांच कर देखा जाएगा कि कहीं एक ही जमीन से दो बार बीमा का लाभ लिया गया, एक ही किसान एक फसल का दो बार अलग-अलग फसल दिखाकर बीमा तो नहीं करवाया, बंजर या पर्ती भूमि को उपजाऊ दिखा कर कहीं लाभ तो नहीं लिया है। कृषि विभाग ऐसे गड़बड़ी कर गलत तरीके से लाभ लेने वाले किसानों को चिन्हित कर कार्रवाई करने के मूड में है।

महोबा जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत हुए 40 करोड़ रुपये के घोटाले के बाद जिले के बीते व इस वर्ष के प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लाभार्थियों के खाते खंगाले जाएंगे। जिले के 2,88,099 किसानों में से हर वर्ष करीब डेढ़ लाख किसान करीब 2,92,768 बीघे रकबे में बोई गई खरीफ व रबी की विभिन्न फसलों में धान, अरहर, गेहूं, चना, मटर, मसूर, सरसों आदि का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करवाता हैं।

इसमें किसान स्वयं व बैंक के जरिए बीमा करवाते हैं। बीते वर्ष 1,45,243 किसानों में से 1,22,096 किसानों ने अपनी फसलों के नुकसान का दावा किया, जिसमें से जिले की अधिकृत बीमा कंपनी यूनिवर्सल सोंपो जनरल बीमा कंपनी ने 8.2 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया।

वहीं इस वर्ष भी खरीफ के सीजन में 1,43,184 किसानों ने अपनी फसलों का बीमा करवाया। इसमें अभी तक 29012 किसानों को 2.6 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जा चुका है। आगे जल्द ही मुआवजा मिलेगा।

लेकिन फिलहाल बीते वर्ष व इस वर्ष में अब तक मिले किसानों को मुआवजे की सघन जांच के निर्देश कृषि विभाग को मिले हैं। इसमें से करीब डेढ़ लाख किसानों के आवेदन से लेकर खाते में भेजी गई धनराशि की सघन विभिन्न पहलुओं पर जांच की जाएगी।

जल्द होगी टीम गठित, एक माह में भेजी जाएगी रिपोर्ट

जिले के फसल बीमा योजना के लाभार्थी डेढ़ लाख किसानों के खातों की जांच के लिए तहसीलवार टीम गठित की जाएगी, जिसमें कृषि व राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल होगें। तहसीलवार किसानों के डाटा में किसानों के आवेदन से लेकर उनकी खाते, खतौनी, रकबे, फसलों का आच्छादन, दो स्थानों से लाभ, गलत जानकारी देकर लाभ लेने आदि का डिटेल खंगाला जाएगा। इसमें जल्द ही टीम गठित की जानी है। एक माह के अंदर जांच प्रक्रिया पूरी कर शासन को रिपोर्ट भेजा जाना है।

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