दुनिया मान रही भारतीयों के दिमाग का लोहा, ग्लोबल कंपनियों के लिए नया ब्रेन हब बना भारत

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इंडियन ब्रेन का लोहा पूरी दुनिया मानती है। NASA से लेकर मल्टी नेशनल कंपनी कर हर तरफ भारतीयों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। ग्लोबल कंपनियों के लिए भारत ब्रेन हब बनता जा रहा है। भारत में 1700 से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) चल रहे हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।

ये मल्टी नेशनल कंपनियों के किसी दूसरे देश में स्थित ऐसे सेंटर हैं, जहां कोर बिजनेस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और स्ट्रैटेजिक फैसले लिए जाते हैं।

भारत में तेजी से बढ़ रही GCC की संख्या

भारत में दुनिया में सबसे ज्यादा 1700 से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स हैं, जो लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत के बाद पोलैंड में करीब 400 और रोमानिया में 300 GCC हैं। साल 2022 में 65 नई GCC भारत में आए और साल 2024 में यह संख्या बढ़कर 136 हो गई।

2024 की बात करें तो भारत में 1700 से ज्यादा GCC हैं, और इनमें 19 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। जो 5.80 लाख करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट किया।

2030 का अनुमान

एक्सपर्ट का अनुमान है कि साल 2030 तक भारत में GCC की संख्या 2500 से ज्यादा हो जाएगी और कर्मचारियों का संख्या 30 लाख तक पहुंच जाएगी। वहीं 10.8 लाख करोड़ रुपए का रेवेन्यू जेनरेट होने का अनुमान जताया है।

BPO से GCC का सफर

  1. साल 2000 में बीपीओ के जरिए बैक ऑफिस और आईटी सपोर्ट जैसे काम।
  2. 2010 से 2015 के बीच रिसर्च एंड डेवलपमेंट, इंजीनियरिंग और एनालिटिक्स पर काम।
  3. 2020 से इसमें और विस्तार हुआ जो डिजिटल ट्विन, ग्लोबल स्ट्रैटेजी व इनोवेशन हब।

GCC सिर्फ सपोर्ट नहीं बल्कि कोर बिजनेस चला रहे हैं और आईटी सेक्टर से ज्यादा रोजगार दे रहे हैं। साल 2024-25 में ही 1.4 लाख लोगों को नौकरी पर रखा है। आपको बता दें कि पहले भारत को सस्ते आउटसोर्सिंग हब के तौर पर चुना जाता था लेकिन अब काबिलियत की वजह से कंपनियां यहां का रुख कर रही हैं।

हाई-वैल्यू सेक्टर्स में दबदबा

  • हेल्थकेयर- 22%
  • ई-टेक- 22%
  • बैंकिंग, इंश्योरेंस-14%
  • रिटेल/ सीपीजी-14%
  • सॉफ्टवेयर/ टेक-7%
  • ट्रांसपोर्ट/ लॉजिस्टिक्स- 7%
  • मैन्यूफैक्चरिंग- 7%
  • मीडिया/ एंटरटेनमेंट- 7%

किस शहर में कितने GCC?

बेंगलुरु- 30%, हैदराबाद- 19%, दिल्ली-एनसीआर- 15%, मुंबई- 12%, पुणे- 10%, चेन्नई- 9%, टियर-2- 5%।

मेट्रो सिटी के बाद कंपनियां लो-कॉस्ट, लो-एट्रिशन टियर-2 शहरों की ओर पैर जमा रही हैं। इनमें जयपुर, अहमदाबाद, कोयम्बटूर, मैसूर, भुवनेश्वर, नागपुर और तिरुवनंतपुरम टॉप पर हैं।

भारत क्यों बन रहा है GCC का फेवरेट हब?

  • टैलेंट पावर- 15 लाख से ज्यादा इंजीनियर ग्रेजुएट हर साल
  • टेक-टैलेंट गैप- भारत 21% बनाम अमेरिका 45%
  • लागत का फायदा- पूर्वी यूरोप से 40% सस्ता ऑपरेशन
  • मल्टी फंक्शनल जीसीसी– 90%
  • पॉलिसी सपोर्ट– कर्नाटक, यूपी, गुजरात, तमिलनाडु की जीसीसी पॉलिसी
  • गुजरात के गिफ्ट सिटी में 10 साल तक टैक्स हॉलिडे भी घोषित
  • डिजिटल इंफ्रा– 5जी, एआई, साइबर सिक्योरिटी इकोसिस्टम।
  • टियर-2 शहरों में 25-30% तक ग्रोथ होने का अनुमान

भारत आ रहीं बड़े आकार की कंपनियां

भारत में 2.25 लाख करोड़ रुपए वाली कंपिनियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस कैटेगिरी की 10 कंपनिया 2022 कर भारत में एंट्री कर चुकी थीं, जिनकी संख्या बढ़कर अब 38 हो गई है। सिर्फ कंपनियों की संख्या ही नहीं बढ़ी है बल्कि हिस्सेदारी भी बढ़ी है। ये साफ इशारा है कि भारत अब सिर्फ सर्विस प्रोवाइडर नहीं बल्कि ग्लोबल स्टैटेजिक पार्टनर भी बन रहा है।

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