ठंड के मौसम में बढ़ा हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा, गुनगुना पानी कर सकता है बचाव

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राजधानी सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में पड़ रही कड़ाके की ठंड के कारण उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) की समस्या बढ़ती जा रही है। इससे हृदयाघात और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड के मौसम में लोग सामान्य से कम पानी पीते हैं, इससे रक्त गाढ़ा होने लगता है और रक्तनलिकाओं में संकुचन आ जाता है।

इसका सीधा असर रक्तचाप पर पड़ता है और वह अनियंत्रित हो सकता है। इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (IGIC) के उप निदेशक डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि ठंड के मौसम में पर्याप्त मात्रा में गुनगुने पानी का सेवन शरीर की तरल आवश्यकताओं को पूरा करता है और रक्त संचार को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।

इस मौसम में हमारी आर्टी में सिकुड़न बढ़ जाती है। ऐसे में रात में सोने से पहले एक गिलास गर्म या गुनगुना पानी पीना हृदय और मस्तिष्क से जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को कम करने में सहायक माना जाता है।

सर्दियों में उच्च प्रोटीन युक्त और सुपाच्य भोजन का सेवन किया जाए, ताकि शरीर की ऊर्जा बनी रहे और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो। नमक का सेवन प्रतिदिन पांच ग्राम से अधिक न हो, क्योंकि अधिक नमक रक्तचाप को तेजी से बढ़ा सकता है।

धूप निकलने पर ही मार्निंग वाक पर जाएं

आइजीआइसी के सीनियर चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शमा रानी ने बताया कि इस मौसम में अचानक बीपी शूट करने की संभावना होती है। ऐसे में सुबह में खुले मैदान में टहलने ना जाएं, धूप निकलने पर ही टहलें। यदि धूप ना निकले तो घर में ही आवश्यक व्यायाम व प्रणायाम करें।

उन्होंने कहा कि नियमित हल्का व्यायाम, टहलना और सक्रिय दिनचर्या अपनाने से भी रक्तचाप नियंत्रित रहता है। संतुलित खानपान, पर्याप्त पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि के माध्यम से सर्दियों में उच्च रक्तचाप और उससे होने वाले गंभीर परिणामों से काफी हद तक बचाव संभव है।

जीवनशैली और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

पीएमसीएच के न्यूरोलाजी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. गुंजन कुमार ने कहा कि ब्रेन हैमरेज (मस्तिष्क में रक्तस्राव) एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, लेकिन सही दिनचर्या, समय पर जांच और सावधानी से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

उच्च रक्तचाप ब्रेन हैमरेज का सबसे बड़ा कारण है। नियमित रूप से बीपी की जांच कराएं। डाक्टर द्वारा दी गई दवाएं समय पर लें। हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और कम वसा वाला भोजन अपनाएं। तला-भुना, ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड से बचें।

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