चित्रकूट में कृषि ऋण संकट गहराया, 1136 करोड़ के वितरण में 330 करोड़ बना एनपीए

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 जनपद में कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण और उसकी वसूली की स्थिति बेहद चिंताजनक होती जा रही है। बैंकों द्वारा किसानों और कृषि से जुड़े लाभार्थियों को दिए गए ऋण का बड़ा हिस्सा समय पर वापस नहीं हो पा रहा है, जिससे न केवल बैंकिंग व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है बल्कि नए किसानों को ऋण उपलब्ध कराने में भी मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।

चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में बैंकों ने जनपद में 72 हजार लाभार्थियों को कुल 1136 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया था, लेकिन इसमें से लगभग 330 करोड़ रुपये एनपीए (गैर निष्पादित परिसंपत्ति) में तब्दील हो चुका है।

यह चौंकाने वाले आंकड़े जिला स्तरीय समीक्षा समिति एवं जिला सलाहकार समिति की बैठक में सामने आए।जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने कृषि क्षेत्र में बढ़ते एनपीए पर गहरी चिंता जताई।

उन्होंने अग्रणी बैंक प्रबंधक (एलडीएम) अनुराग शर्मा को निर्देश दिए कि टाप 100 चिन्हित बड़े बकायेदारों के विरुद्ध अग्रिम वसूली की सख्त कार्रवाई की जाए। एलडीएम ने बताया कि इन बड़े बकायेदारों में कई सक्षम लोग शामिल हैं, जो जानबूझकर ऋण नहीं चुका रहे हैं।

ऐसे बकायेदारों के कारण किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जैसे महत्वपूर्ण ऋणों के वितरण में बैंकों को परेशानी हो रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बड़े बकायेदारों की सूची शीघ्र ही जिला मुख्यालय और सभी तहसीलों में चस्पा की जाएगी।

जिलाधिकारी ने राष्ट्रीयकृत बैंकों के ऋण-जमा अनुपात और वार्षिक ऋण योजना की बैंकवार समीक्षा की। जिन बैंकों का ऋण-जमा अनुपात 40 प्रतिशत से कम पाया गया, तीन दिनों के भीतर सुधार के निर्देश दिए। जनपद में कार्यरत निजी बैंकों द्वारा शासकीय ऋण योजनाओं में अपेक्षित सहयोग न करने पर नाराजगी जताई।

निजी बैंकों में ऋण आवेदनों के लंबित रहने की जानकारी शासन को भेजने के भी निर्देश देते हुए कहा कि पीएम सूर्यघर और सीएम युवा योजना के आवेदनों का बैंक प्राथमिकता के आधार पर करें।

साथ ही बेहतर काम करने वाले बैंक और लाभार्थियों को डीएम ने सम्मानित भी किया। सीडीओ डीएन पांडेय,रिजर्व बैंक के महाप्रबंधक सुधीर पांडेय, उपायुक्त उद्योग संदीप केशरवानी, उपायुक्त स्व-रोजगार डीसी मिश्र रहे।

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