नक्सलियों से अब केवल तीन जिले ही प्रभावित, 2019 से 29 शीर्ष माओवादी कमांडरों किया गया ढेर

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 माओवादियों को बड़ा झटका देते हुए सुरक्षा बलों ने 2019 से अब तक 29 शीर्ष माओवादी नेताओं को ढेर किया है, जिनमें से 14 केंद्रीय समिति सदस्य और पोलित ब्यूरो सदस्य इसी साल मारे गए हैं। अब केवल तीन जिले ही ‘सर्वाधिक वामपंथी उग्रवाद प्रभावित’ के रूप में वर्गीकृत हैं। यह जानकारी मंगलवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दी।

उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों की संख्या 2014 में 10 से घटकर 2025 (अक्टूबर तक) में पांच हो गई है, जो50 प्रतिशत की कमी दर्शाती है। जबकि, प्रभावित जिलों की संख्या में इस अवधि के दौरान 91 प्रतिशत की तेज गिरावट देखी गई है, जो 126 से घटकर 11 हो गई है।

वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या अप्रैल, 2018 में 126 से घटकर जुलाई, 2021 में 90, अप्रैल 2024 में 70, अप्रैल, 2025 में 38 और अक्टूबर, 2025 में 11 हो गई है। अब केवल तीन जिले ही वामपंथी उग्रवाद से ”सबसे अधिक प्रभावित” माने जाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘वामपंथी उग्रवाद के प्रभाव से हाल ही में मुक्त हुए क्षेत्रों में भाकपा (माओवादी) को फिर से स्थापित होने से रोकने के लिए 27 जिलों को सुरक्षा संबंधी व्यय योजना के तहत ‘विरासत और महत्वपूर्ण जिलों’ के रूप में शामिल किया गया है।”

प्रधानमंत्री के नेतृत्व और गृह मंत्री के सफल मार्गदर्शन में वामपंथी उग्रवाद को ”मार्च 2026 तक समाप्त कर दिया जाएगा और अब उनके लिए बचने का कोई रास्ता नहीं है”।

माओवादियों केखिलाफ केंद्र सरकार की जीरो टालरेंस की नीति के परिणामों को रेखांकित करते हुए राय ने कहा कि 2010 में माओवादी ¨हसा अपने चरम पर थी। उसके बाद से 2024 में इन घटनाओं में 81 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई है।

2004 से 2014 (मई तक) माओवादी हिंसा के परिणामस्वरूप 6,508 मौतें हुईं, जिनमें 4,684 नागरिक और 1,824 सुरक्षाकर्मी शामिल थे। अगले दशक में, 2015 से 2025 (मई तक) के बीच मौतों की संख्या 71 प्रतिशत घटकर 1,868 हो गई, जिसमें 1,404 नागरिक और 464 सुरक्षाकर्मी शामिल थे। इस साल मई से नवंबर के बीच 44 मौतें हुई हैं।

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