हार्ट अटैक को अक्सर एक अचानक और बिना चेतावनी वाली घटना माना जाता है, लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि हार्ट अटैक से पहले शरीर कई संकेत (Heart Attack Warning Signs) देने लगता है, जिन्हें पहचानकर तुरंत मदद ली जाए, तो जान बचाई जा सकती है।
ये संकेत कभी साफ तो कभी बेहद मामूली होते हैं, लेकिन इनकी अनदेखी जानलेवा साबित हो सकती है। आइए जानते हैं हार्ट अटैक से पहले शरीर कैसे संकेत (Heart Attack Symptoms) देना शुरू कर देता है।
काम करते वक्त सांस फूलना
साधारण काम करते समय, जैसे चलना, सीढ़ियां चढ़ना या हल्का फर्श साफ करने पर अगर सांस फूलने लगे और यह समस्या अभी-अभी शुरू हुई है, तो यह दिल की कमजोरी का संकेत हो सकता है। जब हार्ट ठीक से खून पंप नहीं कर पाता, तो फेफड़ों तक जरूरी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंचती, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। इसे “डिस्प्निया” कहते हैं और यह हार्ट फेल्योर या कोरोनरी आर्टरी डिजीज का लक्षण हो सकता है।
सीने में दर्द, दबाव या बेचैनी
यह हार्ट अटैक का सबसे कॉमन लक्षण है, लेकिन इसे हमेशा तेज दर्द के रूप में अनुभव नहीं होता। कई बार सीने में भारीपन, जलन, कसाव या दबाव जैसा महसूस होता है। यह दर्द कभी-कभी बाएं हाथ, जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैल सकता है। यह आराम करने पर कम हो सकता है और शारीरिक या भावनात्मक तनाव में बढ़ सकता है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पैरों में सूजन या अचानक वजन बढ़ना
दिल के कमजोर होने पर शरीर में फ्लूएड जमा होने लगते हैं, जिससे पैरों, टखनों और पंजों में सूजन (एडिमा) आ जाती है। साथ ही, बिना किसी कारण के कुछ दिनों में ही वजन तेजी से बढ़ सकता है। यह हार्ट फेल्योर का एक सामान्य संकेत है, क्योंकि दिल शरीर के अंगों से ब्लड को ठीक तरीके से वापस नहीं खींच पाता।
चक्कर आना, बेहोशी या धड़कनों का तेज होना
बिना किसी कारण के चक्कर आना, सिर हल्का होना या बेहोश हो जाना इस बात का संकेत है कि दिमाग तक सही मात्रा में ब्लड नहीं पहुंच पा रहा है। इसी तरह, धड़कनों का अचानक बहुत तेज, धीमा या अनियमित हो जाना भी हार्ट की एलेक्ट्रिक रिदम में गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। ये लक्षण एरिथमिया से जुड़े हो सकते हैं।
असामान्य कमजोरी या थकान
बिना मेहनत के ही बहुत थकान और कमजोरी महसूस होना, खासकर महिलाओं में, हार्ट अटैक का लक्षण हो सकता है। यह थकान आराम करने पर भी दूर नहीं होती। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दिल की मांसपेशियों को सही मात्रा में ब्लड नहीं मिल पा रहा होता है और शरीर के अन्य अंगों तक भी कम ऑक्सीजन पहुंचती है, जिससे व्यक्ति सुस्त और थका हुआ महसूस करता है।

