स्टेशन नहीं, जुआघर! पानीपत रेलवे स्टेशन के खुले रास्तों से घुस रहे असामाजिक तत्व

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 रेलवे स्टेशन इन दिनों सुरक्षा के लिहाज से सवालों के घेरे में है। स्टेशन का चारों तरफ से खुला होना किसी भी संभावित घटना का बड़ा कारण बन सकता है।

हालात ऐसे हैं कि असामाजिक तत्वों के लिए स्टेशन परिसर में घुसना और वारदात को अंजाम देकर आसानी से निकल जाना बेहद सरल है। बढ़ती भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था का इस तरह ढीला पड़ना यात्रियों में अविश्वास पैदा कर रहा है।

पानीपत रेलवे स्टेशन के आसपास कई ऐसे खुले रास्ते हैं जहां किसी तरह की फेंसिंग, गेट या सुरक्षा बंदोबस्त नहीं हैं। इन रास्तों पर न तो जीआरपी का पहरा दिखाई देता है और न ही आरपीएफ की गश्त होती है।

सुरक्षा एजेंसियों की उपस्थिति मुख्यद्वार तक सीमित होने से स्टेशन के खुले किनारे असुरक्षित बने हुए हैं। यही कारण है कि चोरी, मोबाइल झपटमारी और संदिग्ध गतिविधियों की घटनाओं में पिछले कुछ महीनों में इजाफा हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय इन रास्तों से असामाजिक तत्वों का आवागमन और भी बढ़ जाता है।

कई बार यात्रियों ने शिकायत की है कि अंधेरा होने पर स्टेशन की बाहरी सीमाओं पर न पर्याप्त रोशनी है और न ही चौकसी के कोई साधन। उनका कहना है कि अगर कोई बड़ा हादसा हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा और रेलवे कब सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।

स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई बार प्रस्ताव तैयार किए गए, लेकिन वे सिर्फ फाइलों

ही सीमित रह गए। न तो स्टेशन की बाउंड्री पूरी तरह सुरक्षित की गई और न ही अतिरिक्त कैमरे लगाए गए।

जो सीसीटीवी कैमरे मौजूद हैं, उनमें से कई पूरी लोकेशन को कवर नहीं कर पाते हैं। यात्रियों का कहना है कि पानीपत जैसे बड़े औद्योगिक जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशन को यूं ही असुरक्षित नहीं छोड़ा जाना चाहिए। मजबूत बैरिकेडिंग, चौबीसों घंटे गश्त और आधुनिक निगरानी से ही स्टेशन को सुरक्षित बनाया जा सकता है।

पानीपत रेलवे स्टेशन की सुरक्षा बढ़ाने के लिए जीआरपी ने एसपी रेलवे को मेटल डिटेक्टर, हैंड-हेल्ड डिवाइस और एक्स-रे लगेज स्कैनर उपलब्ध कराने का पत्र भेजा है। उपकरण जल्द लगाए जाएंगे, लेकिन स्टेशन के चारों ओर मौजूद खुले व अवैध रास्ते सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं।

मुख्य द्वार पर सख्ती के बावजूद शरारती तत्व बिना जांच के इन्हीं रास्तों से अंदर-बाहर हो सकते हैं। यात्रियों का कहना है कि जब तक इन रास्तों को बंद नहीं किया जाता, तब तक कोई भी सुरक्षा उपकरण प्रभावी साबित नहीं होगा। रेलवे से जल्द कार्रवाई की मांग की गई है।

इंस्पेक्टर चंदन सिंह ने कहा कि रेलवे विभाग से बात करके जल्द अवैध रास्तों को बंद कराया जाएगा, यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखतें हुए पुलिस गश्त को बढ़ाया जाएगा। जो भी व्यक्ति इन अवैध रास्तों से आवागमन करता पाया गया तो उस पर चालान की कार्रवाई की जाएगी।

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