खिलाड़ी कोई और गुजरात का अब्दुल कहीं मोहरा तो नहीं? पुलिस गुजरात तक खंगाल रही नेटवर्क

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 गुजरात के अब्दुल रहमान का करीब पिछले एक वर्ष से बस्ती में आना-जाना बंद हो गया है। 17 वर्षों तक वह इस क्षेत्र में सक्रिय रहा है। खुफिया जांच में उसका कनेक्शन मौजूदा समय में नहीं मिला है। वह दुनियां में है भी या नहीं। पुलिस इसके बारे में गुजरात तक उसका नेटवर्क खंगाल रही है।

इस बीच उसका एक ऑडियो सामने आया है, जिसमें उसने यहां प्रधानमंत्री आवास के लिए क्षेत्र के कथित ग्राम सचिव को 25 हजार रुपये देने का सौदा किया था। इसके इतर जमीन के फर्जी खरीद-फरोख्त में कई हिस्सेदारों का नाम सामने आ रहा है, जिन पर पुलिस की नजर टिकी हुई है।

अब्दुल से राम दुलारे बना व्यक्ति बस्ती में प्रधानमंत्री आवास लेना चाहता था। इसके लिए उसकी कथित सचिव से बातचीत भी फाइनल हो गई थी। प्रसारित एक ऑडियो में अब्दुल कहता है कि उसका दो मार्च को टिकट है। यादव जी आप बिल्कुल चिंता न करें। सल्टौवा या रुधौली ब्लॉक में, मैं जहां भी रहूंगा आपसे मिल लूंगा। मैं और प्रधान मोटरसाइकिल से आएंगे, सब काम हो जाएगा।

छोटा-मोटा मेरा कारोबार है। कपड़े आदि का काम होता है। आएंगे तो आपको इनाम दे देंगे। काम कच्चा न रहने पाए। सेक्रेटरी साहब, किसी को कानों कान खबर न हो। काम होने के बदले 25 हजार दें देंगे। हंसते हुए अपने को पुराना खिलाड़ी बताया।

अब्दुल फिर प्रधान का नाम दोहराता है और कहता है कि वह साथ जरूर रहेंगे। फिर हंसते हुए सेक्रेटरी साहब यह हमारे, आपके और सिर्फ प्रधान के बीच का मामला है। बात कहीं और न जाए। दैनिक जागरण प्रसारित आडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन जो बातें हैं वह राजस्व विभाग में फैले भ्रष्टाचार का एक नमूना भर हैं।

खुफिया विभाग के अधिकारी तेजी से कर रहे छानबीन

इधर गुजरात का अब्दुल बना राम दुलारे शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद खुफिया विभाग के अधिकारी तेजी से छानबीन कर रहे हैं। वह एक पूर्व प्रधान के घर तक पहुंचे, जिसके यहां उसका आना-जाना था। एक मदरसा-मस्जिद में गए, जहां पर उसके लंबे समय तक रहने की बात सामने आ रही है।

हालांकि मदरसे के लोगों ने दावा किया कि राम दुलारे ही अब्दुल थे, लेकिन इसका कोई साक्ष्य नहीं मिल पाया। क्योंकि राम दुलारे बचपन में ही छनवतिया गांव से गायब हो गए थे, जिनका आज तक पता नहीं चला। हालांकि दिवंगत राम दुलारे चौबे का संपत्ति से नाम खारिज करके 8 जुलाई 2005 को लेखपाल ने वसीयत किया है।

बाद में अब्दुल ने अपने को राम दुलारे चौबे के नाम से प्रस्तुत करते हुए जमीन की खरीद-फरोख्त की है। जिसमें फर्जी दस्तावेज लगाए गए हैं। अब्दुल कहीं यहां मोहरा तो नहीं बन गया। पुलिस इसकी भी बारीकी से छानबीन कर रही है। पुलिस अधीक्षक अभिनन्दन का कहना है कि सीओ रुधौली स्वर्णिमा सिंह की टीम जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही कुछ कार्रवाई संभव है।

यह था मामला

गुजरात के वलसाड जिले के भिलाड़ बेस्ट नियर गरीब नवाज होटल भिलाड़ निवासी अब्दुल रहमान खान पुत्र अब्दुल माजिद खान बस्ती जिले के छनवतिया थाना सोनहा निवासी दिवंगत राम दुलारे चौबे पुत्र रुद्रनाथ बन बैठा। ग्राम छनवतिया के मोहम्मद असलम पुत्र अब्दुल खालिद के निर्वाचन कार्ड नंबर स्कैन करके फर्जी मतदाता पहचान पत्र बनवाया। जिसके आधार पर करीब डेढ़ बीघा भूमि एक महिला के नाम से बैनामा किया गया है।

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