पाकिस्तानी से भारतीय बने शाकिब, मतदाता बनने का आ रहा संकट

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आजादी के बाद पाकिस्तान के करांची शहर में बस गए इम्तियाज अली के पौत्र शाकिब अली भारत लौटे तो अब मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने में उनके सामने कई तरह की अड़चनें आ रही हैं। वर्ष 2025 की सूची में उनका नाम है नहीं और पूर्वजों का नाम भी 1987 व 2003 की मतदाता सूची में नहीं है।

इसी आधार पर मतदाता सूची में नाम चढ़ सकता है। उनकी तरह ही शहर में रह रहे दो अन्य परिवारों के सामने भी मुसीबत खड़ी हो गई। शाकिब ने हाल ही में भारत की नागरिकता ली है। उनकी पत्नी अनम तथा बेटे आकिब, अजमत, बेटियां आबिदा व जाबिदा भी भारत की नागरिकता ले चुकी हैं। अब करेली में शाकिब अली परिवार के साथ रह रहे हैं।

एसआइआर अभियान में शाकिब मतदाता सूची में अपना नाम चढ़ाने को लेकर कवायद कर रहे हैं। शाकिब के दादा करांची शहर में कपड़े का कारोबार करते थे, उनके इंतकाल के बाद शाकिब के पिता आदिल अली ने बिजनेस बढ़ाया फिर शाकिब ने कारोबार संभाला। शाकिब कुछ वर्ष पहले मां के साथ प्रयागराज आए थे।

उनके दादा का शहर के चौक में घर था। शाकिब आए तो उनके पूर्वजों में से कोई नहीं मिला। फिर वह पूर्वजों के परिवार के लोगों की तलाश में जुटे। इसके बाद उन्होंने भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया। लगभग छह वर्षों बाद उन्हें भारत की नागरिकता मिली तो वह करेली में रहने लगे। यहां पर भी उन्होंने व्यापार शुरू किया है।

वर्ष 2025 की मतदाता सूची में जिनका नाम है, उन्हें एसआइआर अभियान के तहत गणना पत्रक दिए जा रहे हैं। चूंकि उनका नाम नहीं है तो उन्हें गणना प्रपत्र नहीं मिला। बीएलओ से मिलने पर भी बात नहीं बनीं।

ऑनलाइन प्रपत्र भरना चाहा तो भी सबमिट नहीं हो सका। ऐसे में उन्होंने विधानसभा क्षेत्र के ईआरओ से मुलाकात की लेकिन उन्हें प्रपत्र नहीं मिल सका। उनके अलावा इंग्लैंड और अमेरिका से आकर भारत की नागरिकता लेने वाले दो परिवारों के साथ भी मुश्किल खड़ी हो गई है।

 

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