‘क्यों नहीं लगाया प्लांट?’ सरकार लेगी Ola और मुकेश अंबानी की एनर्जी कंपनी पर एक्शन; ₹18100 Cr की स्कीम का है मामला

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भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) ने एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI Scheme) स्कीम के तीनों बेनिफिशियरी को नए नोटिस जारी किए हैं। ये तीनों बेनिफिशियरी वो हैं, जो अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए तय टाइमलाइन को पूरा नहीं कर पाए।
इन तीनों बेनिफिशियरीज में ओला इलेक्ट्रिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज (जिसके चेयरमैन मुकेश अंबानी हैं) की रिलायंस न्यू एनर्जी और राजेश एक्सपोर्ट्स (ACC एनर्जी स्टोरेज) शामिल हैं। सरकार ने इन तीनों को 30 सितंबर तक जमा हुई पेनल्टी भरने का निर्देश दिया है, जिससे पता चलता है कि एक्सटेंशन और पेनल्टी माफी का अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया है।

 

रोज के हिसाब से लगेगा जुर्माना

सरकार का यह कदम ACC-PLI स्कीम को लागू करने पर इसके सख्त रुख को दर्शाता है। सरकार ने साल 2021 में 50 GWh घरेलू बैटरी सेल बनाने की क्षमता बनाने के लिए 18,100 करोड़ रुपये की पीएलआई स्कीम का एलान किया था।
उस योजना की शर्तों के तहत, कंपनियों को फाइनल एग्रीमेंट पर साइन करने के दो साल के अंदर प्लांट लगाना था। साथ ही घरेलू वैल्यू-एडिशन और इन्वेस्टमेंट माइलस्टोन को भी पूरा करना था। बता दें कि देरी होने पर इन कंपनियों पर अब रोज के हिसाब से पेनल्टी लगेगी और भविष्य के इंसेंटिव पेमेंट से काट ली जाएगी।

तीनों कंपनियों ने मांगी थी मोहलत

इन तीनों कंपनियों ने ही फरवरी में सरकार से तब मोहलत मांगी थी, जब सरकार ने टाइमलाइन का पालन न करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। इनका कहना था कि चीन से जरूरी इक्विपमेंट और प्लांट मशीनरी की सोर्सिंग एक्सपोर्ट पाबंदियों और शिपिंग में देरी की वजह से प्लांट लगाने में देरी हो रही है।
दरअसल वास्तव में एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल प्रोडक्शन के लिए अपस्ट्रीम सप्लाई चेन अभी भी इंपोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर है। इन कंपनियों ने दावा किया कि रुकावटों की वजह से उन्हें सभी सेंट्रल और स्टेट-लेवल मंजूरी मिलने के बावजूद काम धीमा करना पड़ा है।

किसके पास कितनी कैपेसिटी

ACC-PLI स्कीम के तहत 30 GWh कैपेसिटी अलॉट की गयी है। ये कैपेसिटी तीन साल पहले अलॉट की गयी थी। ओला इलेक्ट्रिक को 20 GWh, रिलायंस न्यू एनर्जी को 5 GWh और राजेश एक्सपोर्ट्स को 5 GWh कैपेसिटी दी गयी थी।
बता दें कि प्लांट चालू करने के लिए दिसंबर 2024 की डेडलाइन थी। नए नोटिस का मकसद महीनों की देरी के बाद कम्प्लायंस को लागू करना है।

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