बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA गठबंधन की शानदार जीत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर राजनीतिक परिदृश्य को हिला दिया है। इस जीत के नायक के रूप में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान उभरे हैं, जिनकी रणनीतिक कुशलता और राजनीतिक अनुभव ने पार्टी को निर्णायक सफलता दिलाई। बिहार में इस सफलता के बाद अब उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दावेदारी को और मजबूती मिल गई है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA की शानदार जीत ने भाजपा और उसके सहयोगियों को उत्साहित कर दिया है। इस सफलता में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की रणनीतिक भूमिका को अहम माना जा रहा है। लंबे समय से बिहार की राजनीति और चुनावी रणनीति में सक्रिय प्रधान ने अपनी दूरदर्शी योजना और चुनाव प्रबंधन कौशल से गठबंधन को बड़ी जीत दिलाई।
धर्मेंद्र प्रधान और नीतीश कुमार का लंबा जुड़ाव
धर्मेंद्र प्रधान और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच पुराने समय से अच्छे राजनीतिक संबंध रहे हैं। साल 2015 में जब नीतीश कुमार ने भाजपा से अलग होने का फैसला किया, उस समय प्रधान ने उन्हें समझाने और विकल्प सुझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि प्रधान मूल रूप से ओडिशा से हैं, लेकिन उनकी नीतीश कुमार और बिहार की राजनीति के साथ गहरी नज़दीकियां रही हैं। अटल बिहारी वाजपेयी के समय से ही उनका नीतीश कुमार के परिवार से भी संपर्क रहा है।
2010 के विधानसभा चुनाव से बिहार में सक्रिय रहने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने अब तक पाँच प्रमुख चुनावों में रणनीति बनाने और चुनाव प्रबंधन में अहम जिम्मेदारी निभाई है। इस दौरान उन्होंने राज्य में महीनों तक समय बिताकर स्थानीय राजनीतिक हालात को समझा और प्रभावी रणनीति तैयार की।
चुनावी जिम्मेदारी और रणनीतिक सफलता
साल 2014 में नीतीश कुमार के NDA से अलग होने और 2022 में राजनीतिक अस्थिरता की अटकलों के बीच प्रधान ने मुख्यमंत्री से लगातार संवाद बनाए रखा। उनके मजबूत तालमेल और अमित शाह-पीएम मोदी के साथ भरोसेमंद संबंध ने भाजपा नेतृत्व को बिहार में चुनावी जिम्मेदारी सौंपने में भरोसा दिलाया। इस बार उनकी रणनीति और दूरदर्शिता के कारण भाजपा-NDA ने बिहार में शानदार जीत दर्ज की।

