मोदी की कैबिनेट बैठक से घबराया पाकिस्तान, किया बदला लेने का ऐलान! फिर शहबाज ने भी की हाई-लेवल मीटिंग

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दिल्ली में हुए भीषण धमाके के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सख्त बयान से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। पीएम मोदी ने 24 घंटे के भीतर दूसरी बार साफ कहा है कि आतंकियों और उनके आकाओं को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। प्रारंभिक जांच में इस हमले के तार पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े पाए गए हैं। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान को भारत की ओर से किसी बड़े सैन्य जवाब की आशंका सताने लगी है। इसी डर के चलते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक हाई-लेवल सुरक्षा बैठक बुलाई है।

राष्ट्रपति जरदारी संग शहबाज की आपात बैठक

भारत के संभावित जवाबी हमले से चिंतित प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, आंतरिक मंत्री मोहसिन नक़वी, कानून मंत्री आज़म नज़ीर तारड़, और पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के साथ आपात बैठक की। पाकिस्तान के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने इस बैठक से पहले ही बयान दिया कि भारत और पाकिस्तान “state of war” की स्थिति में हैं। पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री सैयद मुस्तफ़ा कमाल ने यहां तक कह दिया कि “मई से शुरू हुई जंग अभी खत्म नहीं हुई है, और दिल्ली धमाके के बाद बॉर्डर पर फिर तनाव बढ़ गया है।”

रक्षा मंत्री ने मान ली हार

बैठक में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने देश की वास्तविक स्थिति स्वीकार कर ली। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज के सामने कहा कि पाकिस्तान की आर्थिक हालत इतनी खराब है कि वह भारत या अफगानिस्तान से जंग लड़ने की स्थिति में नहीं है। रक्षा मंत्री की यह स्वीकारोक्ति बताती है कि पाकिस्तान अब न केवल आर्थिक बल्कि सैन्य रूप से भी कमजोर हो चुका है।

मोदी के सख्त रुख से उड़ी पाक हुकूमत की नींद

दिल्ली ब्लास्ट को भारत की कैबिनेट और CCS मीटिंग में आतंकी हमला करार दिया गया है। मोदी सरकार ने स्पष्ट कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से कोई समझौता नहीं होगा। पीएम मोदी के इस रुख से पाकिस्तान की सरकार में दहशत फैल गई है, क्योंकि उन्हें पता है कि मोदी जो कहते हैं, वो करते भी हैं।

पिछले समय में भारत तीन बार सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दे चुका है। अब एक बार फिर दिल्ली धमाके के बाद पाकिस्तान में बेचैनी और खलबली मची हुई है- क्योंकि इस बार बदले की गूंज पहले से कहीं ज़्यादा स्पष्ट सुनाई दे रही है।

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