चंडीगढ़ सेक्टर-5 में कारोबारी कुलदीप सिंह मक्कड़ के घर हुई फायरिंग मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने नया मोड़ पकड़ लिया है। जांच में सामने आया है कि इस वारदात के पीछे विदेशी गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और उनके साथी गोल्डी राजपुरा का नेटवर्क काम कर रहा था।
एनआईए ने पटियाला और आसपास के इलाकों में तीन संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की और महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा डिजिटल सबूत बरामद किए। जांच के अनुसार, ये तीनों आरोपी सीधे गोल्डी बराड़ और गोल्डी राजपुरा से जुड़े हुए थे और पंजाब में कारोबारी वर्ग को धमकाकर वसूली करते थे। इस केस की शुरुआत जनवरी 2024 में हुई थी, जब मक्कड़ के घर पर अचानक फायरिंग हुई। हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर गोलियां चलाई, लेकिन मक्कड़ सुरक्षित रहे। इसके कुछ ही समय बाद उन्हें फोन के जरिए धमकी दी गई और तीन करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गई।
एनआईए ने अब तक इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें लड्डी, सरबू, पंडित, गुज्जर, कमलप्रीत, हैप्पी, प्रेम और गगनदीप शामिल हैं। शुरुआती जांच चंडीगढ़ पुलिस कर रही थी, लेकिन गंभीरता को देखते हुए केस को दो महीने बाद एनआईए को सौंप दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, गोल्डी बराड़ विदेश से अपने गिरोह को हथियार, फंड और ठिकाने मुहैया कराता था और पंजाब में अपराधियों के जरिए वसूली और धमकियों का नेटवर्क चलाता था। अब एनआईए उसकी गिरफ्तारी के लिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की तैयारी कर रही है। शुरुआत में यह मामला चंडीगढ़ पुलिस के पास था, लेकिन गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय के आदेश पर इसे एनआईए को ट्रांसफर किया गया। जांच के दौरान साफ हुआ कि पूरी साजिश का मास्टरमाइंड गोल्डी बराड़ ही था, जिसने विदेश से बैठकर वारदात की योजना बनाई।

