भारत में बनेंगे महा-बैंक! सरकार के इस बड़े कदम से बदल जाएगी सारी तस्वीर

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भारत भले ही दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है लेकिन अभी देश का कोई भी बैंक दुनिया के टॉप-10 बैंकों में शामिल नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार अब बड़े और वैश्विक स्तर के बैंक बनाने की तैयारी कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 12वें ‘एसबीआई बैंकिंग एंड इकॉनमिक्स’ सम्मेलन में साफ कहा कि भारत को ऐसे बैंक चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर सकें। इस दिशा में सरकार, आरबीआई और बैंकों के बीच चर्चा जारी है।

सीतारमण ने कहा कि उद्योग जगत को कर्ज की उपलब्धता बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया कि जीएसटी दरों में कटौती से मांग बढ़ेगी, जिससे निवेश और आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। उन्होंने बताया कि सरकार बुनियादी ढांचे के निर्माण पर लगातार जोर दे रही है और पिछले दशक में पूंजीगत खर्च में 5 गुना बढ़ोतरी हुई है।

कैसे बनेंगे बड़े बैंक?

वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि केवल बैंक विलय से ही बड़ा बैंक नहीं बनता। इसके लिए ऐसा वातावरण जरूरी है जिसमें कई बड़े बैंक विकसित हो सकें। हालांकि उन्होंने माना कि इस पर अंतिम निर्णय से पहले बहुत काम बाकी है और आरबीआई की भूमिका अहम होगी।

पहले भी हो चुके हैं बड़े बैंक विलय

सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का विलय किया है। 2017 में 27 सरकारी बैंकों की संख्या घटकर 12 रह गई।

  • एसबीआई में पहले उसके सहायक बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय किया गया।
  • 2020 में PNB, केनरा बैंक, इंडियन बैंक और यूनियन बैंक में कई बैंकों का एकीकरण हुआ।
  • देना बैंक–विजया बैंक का विलय बैंक ऑफ बड़ौदा में किया गया।

इसके अलावा आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी एलआईसी को सौंप दी गई थी और इसमें रणनीतिक बिक्री की प्रक्रिया जारी है।

2030 तक टॉप-10 में जगह मिलने की उम्मीद

एसबीआई चेयरमैन सी.एस. शेट्टी ने कहा कि भारत का सबसे बड़ा बैंक एसबीआई, 2030 तक दुनिया के टॉप 10 बैंकों में शामिल हो सकता है। उन्होंने सार्वजनिक बैंकों में FDI की सीमा 20% से बढ़ाकर 49% करने की सलाह दी है ताकि पूंजी की उपलब्धता बढ़ सके।

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