नेपाल की तरह अब पाकिस्तान में भी युवाओं ने सत्ता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हाल ही में भड़के हिंसक प्रदर्शनों के बाद अब एक नई ‘Gen Z क्रांति’ की आंधी उठ चुकी है। इस बार मोर्चा संभाला है छात्रों ने, जो शिक्षा सुधारों, ट्यूशन फीस वृद्धि और नई मूल्यांकन प्रणाली के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।
कैसे शुरू हुआ आंदोलन
यह विरोध शांतिपूर्ण रूप से ई-मार्किंग (डिजिटल मूल्यांकन) प्रणाली और बढ़ती फीस के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन जल्द ही यह शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ व्यापक संघर्ष में बदल गया। छात्रों का आरोप है कि ई-मार्किंग सिस्टम के कारण रिजल्ट में भारी गड़बड़ी हुई — कई छात्रों को उन विषयों में पास कर दिया गया जिनकी परीक्षा उन्होंने दी ही नहीं।
मुख्य मांगें और विवाद
छात्रों की प्रमुख मांग है कि पुनर्मूल्यांकन शुल्क (प्रति विषय 1500 रुपये) माफ किया जाए, जो सात विषयों के लिए 10,500 रुपये तक पहुंचता है। यह गरीब छात्रों के लिए असंभव है। आंदोलन को अब संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का समर्थन भी मिल रहा है, जिसने अक्टूबर की हिंसक घटनाओं में नेतृत्व किया था।
पिछले महीने की बगावत की गूंज
एक महीने पहले PoK में 30 मांगों के साथ शुरू हुए आंदोलन ने टैक्स छूट, बिजली-आटा सब्सिडी और भ्रष्टाचार विरोध जैसे मुद्दों को उठाया था। पुलिस गोलीबारी में 12 से अधिक नागरिक मारे गए थे। आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और कई मांगें माननी पड़ीं।
नेपाल की तरह सत्ता पलट की आशंका
हालांकि मौजूदा आंदोलन शिक्षा से जुड़ा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर राजनीतिक विस्फोट की ओर बढ़ सकता है। नेपाल में भी युवाओं के नेतृत्व में सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन ओली सरकार के पतन तक पहुंचा था। अब PoK में भी वैसा ही जनविस्फोट सुलगने के संकेत हैं।

