बिहार और झारखंड में छठ पूजा के व्यंजनों में गजब का अंतर, पढ़ें पूरी खबर

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 छठ पूजा एक प्रमुख भारतीय त्योहार है जिसे खासतौर पर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, नेपाल, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है। छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है और इसका समापन सूर्यदेव को सुबह अर्घ्य देने के साथ होता है। इस बार छठ पूजा की शुरुआत शनिवार, 25 अक्टूबर 2025 को होगी और समापन मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025 को प्रातः कालीन अर्घ्य के साथ होगा। छठ पूजा का प्रसाद काफी खास माना जाता है। इसे व्रत रखने वाले लोग बड़े नियम और शुद्धता से बनाते हैं। वहीं, बिहार और झारखंड के छठ प्रसाद के टेस्ट में काफी फर्क होता है।बिहार की बात करें तो यहां ठेकुआ को छठ पूजा का सबसे जरूरी प्रसाद माना जाता है। इसे गेहूं के आटे, गुड़ और देसी घी से तैयार किया जाता है और खास लकड़ी के सांचे से आकार दिया जाता है। इसे धीमी आंच पर तला जाता है जिससे इसकी खुशबू पूरे घर में फैल जाती है। वहीं झारखंड में भी ठेकुआ बनता है, लेकिन कई बार इसमें नारियल पाउडर या तिल भी मिलाया जाता है, जो इसे थोड़ा अलग टेस्ट देता है। कई लोग इसमें इलायची या सौंफ का भी यूज करते हैं।बिहार में कसर के लड्डू यानी चावल के आटे से बने लड्डू छठ का एक खास हिस्सा होते हैं। इन्हें देसी घी में भूनकर गुड़ के साथ मिलाया जाता है, लेकिन झारखंड में नारियल के लड्डू का चलन ज्यादा है।बिहार में रसीया नाम की खीर बनती है जो गुड़ और चावल से तैयार की जाती है। इसका टेस्ट बिल्कुल देसी और पारंपरिक होता है। वहीं झारखंड में भी गुड़ की खीर बनती है, लेकिन कई जगह इसमें नारियल का दूध या पिसा नारियल भी मिलाया जाता है, जो इसे अलग टेस्ट देता है।बिहार में धान की पिट्ठी छठ प्रसाद में कुछ खास नहीं मानी जाती है। वहीं, झारखंड में पिट्ठी, यानी धान की भूसी निकालकर बनाए गए चावल से बनी मिठाई, झारखंड के छठ में विशेष मानी जाती है। इसे गुड़ या तिल भरकर बनाया जाता है।

बिहार में तिल और गुड़ की मिठाइयां मकर संक्रांति में ज्यादा दिखती हैं। छठ में इनका प्रयोग सीमित है। वहीं, झारखंड में तिल-गुड़ की मिठाइयां छठ में खास रूप से बनाई जाती हैं। तिलकुट और तिल लड्डू पूजा में चढ़ाए जाते हैं। झारखंड में बहुत से लोग मानते हैं कि छठ के प्रसाद को मिट्टी के बर्तन और चूल्हे में बनाना शुभ होता है। उनका कहना है कि इससे पकवानों में एक खास खुशबू और टेस्ट आता है। इससे न सिर्फ स्वाद बढ़ता है बल्कि उसमें मिट्टी की खुशबू भी शामिल हो जाती है।

 

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