बेटी के बर्थडे पर ही सजी अर्थी, पिता ने दिल पर पत्थर रखकर चिता के सामने केक काटकर किया अंतिम संस्कार

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छत्तीसगढ़ के कवर्धा से एक ऐसा दृश्य सामने आया है, जिसने हर संवेदनशील दिल को भीतर तक झकझोर दिया। यह सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं, बल्कि एक पिता के टूटे दिल और अनकहे दर्द की गूंज है, जिसे शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। कवर्धा के चिल्फी इलाके में रविवार की शाम एक भयावह सड़क दुर्घटना हुई। कोलकाता से आए एक परिवार की कार की टक्कर ट्रक से हो गई। ये परिवार कान्हा नेशनल पार्क की यात्रा पूरी कर लौट रहा था। उन्हें उसी शाम बिलासपुर से कोलकाता के लिए ट्रेन पकड़नी थी, लेकिन नियति ने रास्ते में ही सब कुछ छीन लिया।

रास्ते में हुए एक्सीडेंट में पांच जिंदगियां बुझ गईं। इन्हीं में शामिल थी एक नन्ही परी – आदित्री – और उसकी मां। बुधवार शाम जब कवर्धा में मां-बेटी का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तभी पिता ने टूटी आवाज़ में कहा, “आज मेरी बिटिया आदित्री का जन्मदिन है…” – यह सुनते ही वहां मौजूद हर आंख छलक पड़ी। स्थानीय लोगों ने उसी अंतिम संस्कार स्थल पर मासूम आदित्री का जन्मदिन मनाने का फैसला किया। किसी ने गुब्बारे लाए, किसी ने केक की व्यवस्था की। मासूम की तस्वीर को जन्मदिन की टोपी पहनाई गई, और आंखों में आंसुओं के साथ वह केक काटा गया – जिसे आदित्री अब कभी नहीं चख पाएगी।

पिता ने अपनी बेटी को उस दिन का आख़िरी तोहफा दिया – एक अधूरी मगर अमर याद।
उसकी गोद अब सूनी है, जीवनसाथी का साथ छूट गया है, और दिल में एक ऐसा शून्य भर गया है जो कभी नहीं भर सकेगा। लेकिन उस अंतिम विदाई में समाया जन्मदिन एक ऐसी कहानी बन गया, जिसे कवर्धा ही नहीं, शायद ये पूरा देश कभी नहीं भुला पाएगा।

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