इस देश की संसद का बड़ा फैसलाः करंसी से हटा देगा जीरो व नई उप-इकाई भी करेगा शुरू, बढ़ती महंगाई को बताया कारण

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ईरान में आसमान छूती महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन ने सरकार को बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। ईरान की संसद ने रविवार, 5 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय मुद्रा ‘रियाल’ से चार जीरो हटाने का बिल पास कर दिया। इस फैसले के बाद अब 1 अमेरिकी डॉलर = 115 ईरानी रियाल के बराबर होगा, जबकि पहले यह 1,150,000 रियाल था।‘रियाल’ से जीरो हटाने वाले इस मॉनेटरी एंड बैंकिंग लॉ संशोधन विधेयक के पक्ष में 144 वोट, जबकि 108 वोट विरोध में पड़े।सरकार का कहना है कि यह कदम वित्तीय लेन-देन को सरल, बैंकिंग दक्षता बढ़ाने और लोगों के आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

 

अब रियाल का नया रूप
नए कानून के अनुसार 1 नया रियाल 10,000 पुराने रियाल के बराबर होगा। एक नई उप-इकाई “किरन” (या घेरन) भी शुरू की जाएगी, जो 1 रियाल का सौवां हिस्सा होगी। यानी, अगर आज कोई चीज़ 10,00,000 रियाल की है, तो नए सिस्टम में वह 100 रियाल में मिलेगी।

ट्रांजिशन पीरियड
पुराने और नए दोनों रियाल अगले 3 वर्षों तक एक साथ प्रचलन में रहेंगे। ईरान का केंद्रीय बैंक (CBI) दो वर्षों के भीतर नया सिस्टम लागू करेगा और जनता को आधिकारिक मीडिया के जरिए सूचित करेगा।

 

बदलाव के फायदे

  • वित्तीय लेन-देन में संख्याएं छोटी हो जाएंगी।
  • खरीदारी और अकाउंटिंग आसान होगी।
  • कंप्यूटर, मोबाइल ऐप और एटीएम सिस्टम में डेटा हैंडलिंग सरल होगी।
  • नागरिकों के लिए कैलकुलेशन और दैनिक खर्च समझना आसान होगा।
  • हालांकि, मुद्रा की वास्तविक वैल्यू (Value) में कोई बदलाव नहीं होगा।
  • यानी, यह सिर्फ “अंकों में सुधार” है, न कि मुद्रा के वास्तविक मूल्य में बढ़ोतरी।

 

क्यों उठाया यह कदम 
पिछले कुछ वर्षों में ईरान में हाइपर-इन्फ्लेशन (Hyperinflation) ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। एक डॉलर की कीमत लाखों रियाल तक पहुंच जाने से दैनिक लेन-देन मुश्किल हो गया था। मुद्रा नोटों की उपयोगिता घट गई थी और ट्रांजैक्शन सिस्टम बोझिल हो चुका था।

 

दुनिया में पहले भी हुए ऐसे फैसले

  • वेनेजुएला ने अक्टूबर 2021 में अपनी मुद्रा से 6 जीरो हटाए थे।
  • जिम्बाब्वे, तुर्की और अर्जेंटीना जैसे देश भी पहले ऐसी ही आर्थिक नीति अपना चुके हैं।
  • ईरान में इससे पहले मई 2020 में ‘तोमान’ को आधिकारिक मुद्रा घोषित करने का प्रस्ताव पास हुआ था, जो 10,000 रियाल के बराबर था।

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