कुमाऊं में सेब की खेती से बढ़ी बागवानों की कमाई, नई तकनीक से कम जमीन में मिल रही बेहतर पैदावार

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उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में सेब उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अपनाई जा रही आधुनिक तकनीक बागवानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। अब पारंपरिक तरीके से अलग हटकर हाई डेंसिटी प्लांटेशन यानी सघन बागवानी तकनीक के जरिए कम जमीन में अधिक पौधे लगाए जा रहे हैं। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ बागवानों की आमदनी में भी सुधार की संभावनाएं बढ़ी हैं।

क्या है हाई डेंसिटी प्लांटेशन तकनीक?

पारंपरिक खेती में सेब के पेड़ों के बीच आमतौर पर 5 से 7 मीटर की दूरी रखी जाती है। वहीं, हाई डेंसिटी प्लांटेशन में पौधों को करीब एक मीटर की दूरी पर लगाया जाता है। इस तरीके से सीमित क्षेत्र में अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं। बेहतर किस्मों के पौधे, ड्रिप सिंचाई और पौधों को सहारा देने वाली आधुनिक संरचना भी इस तकनीक का हिस्सा हैं।

कम जमीन में भी बेहतर उत्पादन

उत्तराखंड के चंपावत जिले में किसान देवकी देवी ने पांच नाली जमीन में हाई डेंसिटी तकनीक से सेब के करीब 250 पौधे लगाए थे। उन्होंने गाला मेमा और रेड डिलिशियस जैसी किस्मों का चयन किया। शुरुआती फसल से उन्हें बेहतर बाजार मूल्य मिला। इस तकनीक का एक फायदा यह भी है कि कुछ किस्मों में पारंपरिक बागानों की तुलना में फल जल्दी तैयार हो सकते हैं।

जल्दी तैयार होती है फसल, मिल सकता है बाजार का लाभ

नई तकनीक से तैयार सेब की कुछ किस्में सामान्य सीजन से पहले बाजार में पहुंच सकती हैं। इससे बागवानों को बेहतर कीमत मिलने का अवसर मिलता है। समय पर कटाई, पौधों की उचित देखभाल और बाजार तक पहुंच भी कमाई को प्रभावित करने वाले अहम पहलू हैं।

कुमाऊं में बागवानी की नई संभावनाएं

कुमाऊं के नैनीताल, चंपावत और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक तरीकों और नई किस्मों पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम ऊंचाई वाले इलाकों में उगाई जा सकने वाली कम शीत-आवश्यकता वाली किस्में भी सेब उत्पादन का दायरा बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

हालांकि, नई तकनीक अपनाने के लिए शुरुआती निवेश, पौधों की गुणवत्ता, सिंचाई, मौसम और बाजार की उपलब्धता पर ध्यान देना जरूरी है। जलवायु परिवर्तन और खेती की लागत जैसी चुनौतियां भी बागवानों के सामने बनी हुई हैं।

कुल मिलाकर, कुमाऊं में आधुनिक बागवानी तकनीक से सेब उत्पादन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यदि किसानों को सही प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण पौधे और बाजार की सुविधा मिलती है, तो सीमित जमीन वाले बागवानों के लिए भी सेब की खेती आय का बेहतर साधन बन सकती है।

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