28 साल की लड़ाई लड़ने के बाद 86 वर्षीय रामबाबू को मिला न्याय, बिजली विभाग के खिलाफ हुई कार्रवाई

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काफी समय तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद हार नहीं मानी। आखिरकार सत्य और न्याय की ऐसी जीत हुई। जिसने न्याय प्रणाली पर आम जनता के भरोसे को और मजबूत कर दिया है।

औरैया ब्लाक के ग्राम मिहौली निवासी 86 वर्षीय वयोवृद्ध रामबाबू शर्मा को 28 वर्षों बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग से पूर्ण न्याय मिला।

चेक सौंपकर अंतिम निस्तारण

आयोग के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्र एवं महिला सदस्या अमिता निगम और सदस्य जितेन्द्र सिंह कुशवाह की पीठ ने निष्पादन वाद में अंतिम बकाया 21,470 रुपये का बैंक चेक रामबाबू को सौंपकर मामले का अंतिम निस्तारण कर दिया।

जिला उपभोक्ता आयोग मध्यस्थता प्रकोष्ठ के सदस्य अधिवक्ता संजीव पांडेय ने पीड़ित वृद्ध की पैरवी कर न्याय दिलाया। बताया कि 86 वर्षीय रामबाबू शर्मा को परिजन अपने हाथों का सहारा देकर ब्लाक परिसर स्थित उपभोक्ता आयोग में लाए।

लाचारी देखकर जिला आयोग के कर्मचारियों ने संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की। आपस में तालमेल बनाया और बेहद मुस्तैदी से सभी कागजी औपचारिकताएं पूरी कर त्वरित गति से चेक तैयार की।

सच परेशान हो सकता, कभी हारता नहीं’

आयोग के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्र ने न्यायपीठ की गरिमा रखते हुए मानवीय मूल्यों का परिचय दिया। उन्होंने 86 वर्षीय वृद्ध को न्याय कक्ष अपने कक्ष से बाहर निकलकर रामबाबू को सम्मानपूर्वक चेक सौंपी।

इस दृश्य पर कोर्ट परिसर में मौजूद अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और अन्य वादकारियों की आंखें नम हो गईं। रामबाबू बोले कि ‘सच परेशान हो सकता, कभी हारता नहीं’ यह उपभोक्ता आयोग के फैसले ने सिद्ध कर दिया।

यह था मामला

उल्लेखनीय है कि इस मामले की शुरुआत वर्ष 1998 में हुई थी। जब रामबाबू शर्मा ने अपनी आजीविका चलाने के लिए विश्वकर्मा कृषि यंत्र उद्योग नाम से एक छोटी वर्कशाप लगाने के लिए बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था।

उन्होंने विद्युत विभाग के निर्देशानुसार कोटेशन व मीटर किराए की राशि भी जमा कर दी थी। काम शुरू करने के लिए वेल्डिंग व ड्रिल मशीनें खरीद ली थीं, लेकिन बिजली विभाग की घोर लापरवाही के कारण कनेक्शन चालू नहीं हुआ, जिससे उनका स्वरोजगार शुरू होने से पहले ही ठप हो गया और आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। बिजली विभाग के चक्कर काटते रहे।

थक हारकर वर्ष 2015 में जिला उपभोक्ता फोरम की शरण ली। वर्ष 2016 में फोरम ने परिवादी के पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद बिजली विभाग राज्य आयोग लखनऊ गया। जहां 2020 में राज्य आयोग ने भी जमा राशि ब्याज सहित लौटाने तथा क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।

इसके बावजूद विभाग टालमटोल करता रहा। निष्पादन वाद में अधिवक्ता की प्रभावी कानूनी कार्रवाई से तहसील के माध्यम से आरसी जारी कराकर यह धनराशि वसूल की गई।

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