41वीं इंदिरा मैराथन: क्या 39 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे नए धावक? स्वरूप सिंह और सत्यभामा के कीर्तिमान पर सबकी नजर
देश की प्रतिष्ठित इंदिरा मैराथन का 41वां आयोजन एक बार फिर खेल प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बार प्रतियोगिता में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोई धावक पिछले 39 वर्षों से कायम स्वरूप सिंह और सत्यभामा के अटूट रिकॉर्ड को तोड़ने में कामयाब हो पाएगा? इस सवाल को लेकर खिलाड़ियों से लेकर खेल प्रशंसकों तक में उत्सुकता बनी हुई है।
इंदिरा मैराथन भारतीय एथलेटिक्स की महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है। हर साल देशभर से लंबी दूरी के धावक इसमें हिस्सा लेते हैं और अपनी क्षमता का प्रदर्शन करते हैं। लेकिन इस प्रतियोगिता के इतिहास में स्वरूप सिंह और सत्यभामा के नाम दर्ज रिकॉर्ड आज भी चुनौती बने हुए हैं।
करीब चार दशक से इन दोनों धावकों के कीर्तिमान कायम हैं। यही वजह है कि 41वीं इंदिरा मैराथन में प्रतिभागियों के प्रदर्शन के साथ-साथ सबकी निगाहें इन पुराने रिकॉर्ड पर भी टिकी रहेंगी। इस बार प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले धावकों के सामने न केवल बेहतर प्रदर्शन करने, बल्कि इतिहास रचने का भी मौका होगा।
मैराथन को लेकर खेल जगत में चर्चा तेज है कि क्या इस बार कोई नया खिलाड़ी पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ पाएगा या फिर स्वरूप सिंह और सत्यभामा का कीर्तिमान एक बार फिर बरकरार रहेगा।
फिलहाल, 41वीं इंदिरा मैराथन के नतीजों का इंतजार है। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों की मेहनत, धैर्य और प्रदर्शन ही तय करेगा कि दशकों पुराना रिकॉर्ड कायम रहता है या नया इतिहास लिखा जाता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

