क्या NCL निगाही परियोजना के ईस्ट पार्किंग में काम कर रही सिक्योरिटी कंपनी ही करवा रही डीजल की चोरी? आखिर कैसे हालपैक डंफर से निकला 400 लीटर डीजल?

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सिंगरौली। नवानगर थाना क्षेत्र अंतर्गत एनसीएल की निगाही परियोजना के ईस्ट पार्किंग क्षेत्र से कथित रूप से बड़े पैमाने पर डीजल चोरी का मामला सामने आया है। रविवार की रात्रि करीब 10:30 बजे एनसीएल सुरक्षा विभाग ने मेंटेनेंस कार्य में लगी एक बोलेरो कैंपर वाहन को पकड़ा, जिसमें दो ड्रमों में भरा लगभग 400 लीटर संदिग्ध डीजल बरामद होने की जानकारी सामने आई है। वाहन चालक मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। एनसीएल सुरक्षा विभाग द्वारा पकड़े गए वाहन एवं बरामद डीजल को नवानगर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

निजी सुरक्षा एजेंसी की भूमिका?

इस घटना के बाद निगाही परियोजना के ईस्ट पार्किंग क्षेत्र में तैनात निजी सुरक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जिस क्षेत्र से कथित तौर पर डीजल चोरी किया जा रहा था, वहां सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में डीजल चोरी कैसे हो गया। सूत्रों के अनुसार, ईस्ट पार्किंग क्षेत्र में लंबे समय से डीजल चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह की सक्रियता की चर्चा रही है। आरोप हैं कि पार्किंग क्षेत्र में तैनात कुछ निजी सुरक्षा एजेंसी जितेंद्र पाल सिंह खेड़ा नामक कंपनी कार्यरत है जिसके सुरक्षाकर्मियों की कथित अनदेखी अथवा संभावित मिलीभगत के कारण चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया जाता रहा।

फोरमैन की नजर पड़ते ही वायरलेस पर दी गई सूचना

जानकारी के अनुसार, रविवार की रात ईस्ट पार्किंग क्षेत्र में खड़े हालपैक डंपरों और अन्य भारी मशीनों से कथित रूप से डीजल निकाला गया। इसके बाद डीजल को दो ड्रमों में भरकर मेंटेनेंस कार्य में लगी बोलेरो कैंपर वाहन में लोड किए जाने की तैयारी की जा रही थी। बताया जा रहा है कि इसी दौरान परियोजना के एक फोरमैन की नजर इस गतिविधि पर पड़ गई। फोरमैन ने बिना देरी किए वायरलेस सेट के माध्यम से एनसीएल सुरक्षा विभाग एवं संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही सुरक्षा कर्मियों ने कार्रवाई करते हुए वाहन और डीजल को पकड़ लिया। हालांकि वाहन चालक मौके से फरार होने में सफल रहा।सूत्रों के हवाले से चालक की पहचान को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हैं, सूत्र बताते हैं कि उक्त बोलोरो कैंपर को पूर्व के विवादित NCL कर्मी का पुत्र चला रहा था?

कैसे दिया जाता था कथित चोरी को अंजाम?

सूत्रों और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, डीजल चोरी के कथित तरीके को लेकर जांच में कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आ सकते हैं। आरोप है कि संगठित गिरोह द्वारा ईस्ट पार्किंग क्षेत्र में खड़े भारी वाहनों, हालपैक डंपरों और अन्य मशीनों से डीजल निकाला जाता था। इसके बाद चोरी किए गए डीजल को परियोजना क्षेत्र में उपलब्ध खाली ड्रमों में भरने की बात कही जा रही है। आरोप है कि बाद में मेंटेनेंस कार्य में लगी वाहनों की मदद से डीजल को परियोजना क्षेत्र के बाहर अथवा सुनसान स्थानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता था। सूत्रों के अनुसार, डीजल को कथित रूप से झंडा बाबा क्षेत्र के आसपास झाड़ियों में छिपाकर बाद में बाहर निकालने की योजना बनाई जाती थी। यदि जांच में इस तरह के संगठित नेटवर्क की पुष्टि होती है तो यह एनसीएल की सुरक्षा व्यवस्था और परियोजना में तैनात निजी सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।

प्रतिदिन बड़ी मात्रा में डीजल चोरी?

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस क्षेत्र से लंबे समय से प्रतिदिन सैकड़ों लीटर डीजल चोरी किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि इन दावों की जांच में पुष्टि होती है तो एनसीएल को लंबे समय से भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारी मशीनों और डंपरों से डीजल निकाले जाने जैसी गतिविधियां सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में कैसे संभव हो रही थीं। क्या सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक हुई, या फिर इस पूरे मामले में किसी की कथित मिलीभगत की भूमिका है? इसका जवाब अब पुलिस और एनसीएल की आंतरिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

एनसीएल क्या करेगा कार्रवाई?

400 लीटर डीजल के साथ वाहन पकड़े जाने और मामले के पुलिस तक पहुंचने के बाद अब निगाहें एनसीएल प्रबंधन पर टिकी हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस ईस्ट पार्किंग क्षेत्र में यह घटना सामने आई, वहां तैनात निजी सुरक्षा एजेंसी की भूमिका की क्या अलग से जांच की जाएगी? क्या संबंधित सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ होगी? क्या सुरक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाएगी? और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत की पुष्टि होती है तो एनसीएल प्रबंधन द्वारा क्या कार्रवाई की जाएगी? फिलहाल, नवानगर पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम, वाहन चालक, डीजल के स्रोत तथा कथित चोरी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

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