हरियाणा के पानीपत से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नवजात बच्चे को लेकर दो परिवारों के बीच विवाद खड़ा हो गया है। बच्चे की मां की मौत के बाद उसके पालन-पोषण और अभिभावक होने के दावे को लेकर दोनों परिवार आमने-सामने आ गए हैं। मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब आरोप लगा कि एक पड़ोसी ने 20 हजार रुपये लेकर नवजात बच्चे को दूसरे परिवार को सौंप दिया।
जानकारी के मुताबिक, नवजात की मां की मौत के बाद बच्चे की देखभाल को लेकर स्थिति पैदा हुई। इसी दौरान पड़ोसी की भूमिका सामने आई। आरोप है कि पड़ोसी ने 20 हजार रुपये लेकर बच्चे को एक परिवार के हवाले कर दिया। इसके बाद बच्चे पर दूसरे परिवार ने भी अपना दावा पेश कर दिया।
दोनों परिवारों की ओर से बच्चे पर अधिकार जताए जाने के बाद मामला विवाद का रूप ले गया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नवजात का वास्तविक कानूनी अभिभावक कौन है और बच्चे को किसके संरक्षण में रखा जाना चाहिए।
इस मामले में बच्चे की सुरक्षा और उसके भविष्य को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। नवजात की देखभाल, उसकी पहचान और अभिभावकत्व से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। किसी भी बच्चे को पैसों के लेन-देन के आधार पर सौंपना कानूनी प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकता।
ऐसे मामलों में बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दी जाती है। बाल कल्याण समिति और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियां बच्चे की सुरक्षा और उचित संरक्षण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
फिलहाल, पानीपत का यह मामला चर्चा में है। पुलिस और संबंधित अधिकारियों की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चे पर दोनों परिवारों के दावों की सच्चाई क्या है और 20 हजार रुपये लेकर बच्चे को सौंपने के आरोप में कितनी सच्चाई है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

