बेटियों की शिक्षा और सम्मान को लेकर सरकारें बड़े-बड़े दावे करती हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चलाए जाते हैं, ताकि हर बेटी को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिल सकें। लेकिन झारखंड के गढ़वा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
दरअसल, गढ़वा के एक कन्या विद्यालय में पढ़ने वाली करीब 160 छात्राओं को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल में शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्राओं को काफी दिक्कतें हो रही हैं।
विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए शौचालय जैसी जरूरी सुविधा का अभाव उनकी पढ़ाई और दैनिक दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। खासकर छात्राओं को स्कूल के समय में काफी असुविधा होती है। सवाल यह है कि जब विद्यालय में इतनी बड़ी संख्या में छात्राएं पढ़ रही हैं, तो उनके लिए बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
शिक्षा का अधिकार केवल स्कूल में दाखिला दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्राओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना भी जरूरी है। शौचालय की सुविधा किसी भी विद्यालय की मूलभूत जरूरतों में शामिल है।
ऐसे में स्थानीय शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि मामले का संज्ञान लेकर जल्द से जल्द समस्या का समाधान करें। साथ ही विद्यालय में छात्राओं के लिए पर्याप्त और साफ-सुथरे शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर 160 छात्राओं की इस परेशानी पर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर कब पड़ेगी? क्या छात्राओं को उनकी बुनियादी सुविधा के लिए भी इंतजार करना पड़ेगा?

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

