कोटिया विवाद पर ओडिशा की सियासत गरमाई, नवीन पटनायक ने CM माझी को लिखा दूसरा पत्र; केंद्र से तुरंत बातचीत की मांग

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ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे कोटिया सीमा विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे पर ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को घेरा है। नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री को दूसरा पत्र लिखकर विवाद के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने और केंद्र सरकार से बातचीत करने की मांग की है।

दरअसल, कोरापुट जिले के पोट्टांगी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाला कोटिया क्षेत्र लंबे समय से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच विवाद का विषय बना हुआ है। इस क्षेत्र में कुल 28 गांव हैं, जिनमें से 21 गांवों पर दोनों राज्य अपना-अपना दावा करते रहे हैं।

ताजा विवाद उस समय फिर सुर्खियों में आया, जब आंध्र प्रदेश की ओर से कोटिया क्षेत्र के कुछ गांवों में स्थानीय निकाय चुनाव कराने की तैयारी की गई। इससे ओडिशा की क्षेत्रीय सीमाओं और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर सवाल उठने लगे।

नवीन पटनायक ने 4 नवंबर को मुख्यमंत्री माझी को लिखे अपने दूसरे पत्र में कहा कि कोटिया की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। उन्होंने आंध्र प्रदेश की चुनावी गतिविधियों और दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता जताई। साथ ही मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की।
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इससे पहले 19 अक्टूबर को भी नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 27 अक्टूबर को कहा था कि कोटिया ओडिशा का अभिन्न हिस्सा है और राज्य सरकार कानूनी तथा संवैधानिक तरीके से अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा कर रही है। माझी ने नवीन पटनायक से विवाद के समाधान के लिए रचनात्मक सुझाव भी मांगे थे।
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गौरतलब है कि कोटिया विवाद कई दशकों पुराना है और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। दोनों राज्यों के बीच इस क्षेत्र को लेकर प्रशासनिक और क्षेत्रीय दावे लगातार जारी हैं।

अब नवीन पटनायक के नए पत्र के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सभी की नजरें इस बात पर हैं कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं और केंद्र सरकार के साथ बातचीत को लेकर आगे क्या रणनीति अपनाई जाती है।

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