जम्मू-कश्मीर में तीसरे मोर्चे की तैयारी? आजाद, इंजीनियर रशीद और रुहुल्ला को एक मंच पर लाने की चर्चा तेज
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नए राजनीतिक समीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश में तीसरे मोर्चे के गठन की सुगबुगाहट के बीच अब तीन प्रमुख राजनीतिक चेहरों को एक मंच पर लाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इनमें डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के प्रमुख गुलाम नबी आजाद, सांसद इंजीनियर राशिद और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी के नाम चर्चा में हैं।
राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या ये तीनों नेता अपने अलग-अलग राजनीतिक रास्तों को छोड़कर किसी साझा मंच पर आ सकते हैं? अगर ऐसा होता है, तो जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।
गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वहीं इंजीनियर राशिद अपनी अलग राजनीतिक पहचान रखते हैं। दूसरी ओर आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी भी कश्मीर के राजनीतिक मुद्दों पर अपनी मुखर राय के लिए जाने जाते हैं।
इन नेताओं को एक साथ लाने की चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक विकल्प और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर बहस जारी है। तीसरे मोर्चे की संभावित रणनीति में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, राजनीतिक अधिकार और जनता से जुड़े मुद्दे अहम हो सकते हैं।
हालांकि, इन तीनों नेताओं के बीच किसी औपचारिक गठबंधन या साझा मंच को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बातचीत आगे बढ़ती है या तीसरे मोर्चे की यह चर्चा केवल राजनीतिक संभावनाओं तक सीमित रह जाती है।
फिलहाल जम्मू-कश्मीर की सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आजाद, इंजीनियर राशिद और रुहुल्ला एक मंच पर आएंगे? अगर ऐसा हुआ, तो प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

