बिहार के हिलसा रेलवे स्टेशन की बदहाली एक बार फिर चर्चा में है। करीब 23 साल पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस स्टेशन का उद्घाटन किया था। लेकिन इतने लंबे समय बीत जाने के बाद भी स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का टोटा बना हुआ है। विकास के दावों के बीच हिलसा स्टेशन की मौजूदा स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय लोगों और रेल यात्रियों को उम्मीद थी कि उद्घाटन के बाद स्टेशन का कायाकल्प होगा और यहां आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन समय बीतने के साथ यात्रियों की उम्मीदें पूरी होने के बजाय समस्याएं बढ़ती नजर आ रही हैं।
स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए रेल यात्रा के दौरान सुविधाओं का अभाव मुश्किलें बढ़ा देता है।
हिलसा स्टेशन क्षेत्र के लोगों के लिए रेल परिवहन का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में स्टेशन पर पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराना रेलवे की प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन 23 साल बाद भी यात्रियों को बेहतर व्यवस्था का इंतजार करना पड़ रहा है।
अब सवाल यह है कि आखिर इतने वर्षों में हिलसा स्टेशन की तस्वीर क्यों नहीं बदली? क्या रेलवे और संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस स्टेशन की समस्याओं की ओर जाएगा? और यात्रियों को कब तक बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार करना पड़ेगा?
हिलसा स्टेशन की बदहाली अब स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। यात्रियों की मांग है कि रेलवे प्रशासन जल्द से जल्द स्टेशन का निरीक्षण करे और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाए।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

