दिल्ली में फिर दोहरा सकता है सत्य निकेतन जैसा हादसा, मंगोलपुरी पंजाबी कैंप की जर्जर इमारत दे रही न्योता
मंगोलपुरी पंजाबी कैंप जर्जर होने के होने के फिर सत्य निकेतन जैसा हादसा हो सकता है। जहां 250 से अधिक परिवार जान जोखिम में डालकर रह रहे है। दो मंजिला इस इमारत में जगह-जगह छतों का मलबा गिरने के कारण लौहे के सरिये बाहर दिखाई दे रहा है।
प्रशासन की ओर से कैंप की इमारत के रखरखाव नहीं किया गया
लेकिन प्रशासन की ओर से कैंप की इमारत के रखरखाव नहीं किया गया। जिसके कारण कैंप की स्थिति जर्जर होती चली गई। अब इमारत के अधिकतर कमरे खंडहर हो चुके है। जहां किसी भी समय अचानक से छत का मलबा गिर जाता है। तो कभी इमारत का कोई हिस्सा। ऐसे में लोग डर के साये में जी रहे है।
कमरों के सामने बनी छज्जे की दीवार में दरार व झुकी हुई है। इमारत के ऊपरी तलों पर पैर रखते ही छत हिलने लगती है। दीवारों पर पकड़ने पर मन में डर रहता है कि दीवार गिर न जाएं। कैंप में इमारत 90 प्रतिशत खस्ता हो चुकी है। इतना ही नहीं यहां लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे है।
नियमित सफाई न होने के कारण जलनिकासी बाधित
नालियों की नियमित सफाई न होने के कारण जलनिकासी बाधित रहती है और ओवरफ्लो होकर गंदा पानी परिसर में भर जाता है। मानसून के दौरान स्थिति और भी गंभीर बन जाती है। जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष जगदीश राज ने बताया कि 2001 के बाद कैंप में किसी प्रकार की कोई मरम्मत नहीं की गई।
दो-तीन वर्ष पूर्व इमारत को प्रशासन द्वारा खतरनाक घोषित किया जा चुका है। मजबूरन लोग इमारत में रह रहे है। हमारी मांग है कि कैंप का दोबारा से निर्माण कर सरकार हमारे घर हमें दें। ताकि बिना डर डर के अपने घरों में रह सकें।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

