कुशीनगर के सड़क हादसे में भलुही गांव से एक साथ उठी 6 अर्थियां, पूरे गांव में शोक की लहर

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संवाद सूत्र, बोदरवार(कुशीनगर)। रविवार की रात भलुही गांव के लिए कभी न भूलने वाली काली रात बन गई। तिलक समारोह में शामिल होने गए गांव के 6 लोगों की सड़क हादसे में मौत की खबर पहुंची तो हर तरफ चीख-पुकार मच गई। किसी ने पति खोया तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। किसी का सुहाग उजड़ गया तो किसी के मासूम बच्चों के सिर से पिता का हाथ छिन गया।

सोमवार को जब एक-एक कर छह अर्थियां उठीं तो गांव का माहौल फिर करुण क्रंदन से भर गया। अपनों को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़े लोगों की आंखें भी नम हो गईं। ऐसा लगा कि मानो पूरा गांव एक साथ रो रहा हो।

ग्राम प्रधान कमलावती देवी के परिवार पर तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके पति व प्रधान प्रतिनिधि कन्हैया प्रसाद (45), ससुर रामबेलास (65) और देवर राममिलन (37) एक ही हादसे में दुनिया छोड़ गए। रविवार शाम करीब छह बजे कन्हैया प्रसाद अपने पिता और भाई समेत आठ लोगों के साथ रिश्तेदारी में तिलक समारोह में शामिल होने निकले थे। किसी को क्या पता था कि घर से हंसी-खुशी निकले इन लोगों में से छह कभी लौटकर नहीं आएंगे। घर में कमलावती देवी के साथ बेटे अंशुमान (23) और बेटी सिप्पी (19) का रो-रोकर बुरा हाल है।

एक ही झटके में पति, ससुर और देवर को खोने का दर्द परिवार के हर सदस्य के चेहरे पर साफ दिख रहा था। घर पहुंचने वाले लोग स्वजन को ढांढस बंधा रहे थे, लेकिन खुद भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। हादसे में जान गंवाने वाले सीआरपीएफ जवान रंजय गुप्ता के घर का दृश्य भी हृदयविदारक था। पत्नी आरती, मां शरमावती देवी और तीन छोटे बच्चों शिवांगी (आठ), शिवांश (छह) व काव्या (तीन) की आंखें अपनों को तलाश रही थीं। मां की सिसकियों के बीच मासूम बच्चों को शायद अभी यह भी समझ नहीं आ रहा था कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है।

मृदुल मिश्र (35) के दरवाजे पर भी सांत्वना देने वालों की भीड़ जुटी रही। पत्नी बीनू तिवारी और छह वर्षीय बेटे रुद्रांश तथा चार वर्षीय बेटी त्रिशा को देखकर लोगों का कलेजा कांप उठा। हर कोई परिवार को संभालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इस असहनीय दुख के आगे शब्द भी छोटे पड़ जा रहे थे। हादसे में कार चालक मिथिलेश गुप्ता की भी मौत हो गई। वहीं राममिलन के बेटे आरएन और आयुष गंभीर रूप से घायल हैं। एक ओर छह घरों में मातम था तो दूसरी ओर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे बच्चों के लिए दुआएं मांगी जा रही थीं।

अंतिम विदाई में रो पड़ा गांव
अंतिम संस्कार के लिए अर्थियां उठीं तो स्वजन की चीखें सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें छलक पड़ीं। कोई अपनों को कंधा देते हुए फफक पड़ा तो कोई बच्चों को सीने से लगाकर चुप कराने की कोशिश करता रहा।

गांव की गलियों से गुजरती अर्थियों के साथ लोगों की भीड़ चल रही थी, लेकिन हर चेहरे पर दर्द था। विधायक विनय प्रकाश गोंड, भाजपा नेता संजय सिंह मुन्ना और सपा नेता निथुरी राजभर ने परिवारों को ढांढस बंधाया। सांसद विजय कुमार दूबे, विधायक मोहन वर्मा और पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया।

 

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