हरियाणा के पुलिस वाले सबसे भ्रष्ट, राजस्व विभाग में भी जमकर भ्रष्टाचार; अब रिश्वत के लिए चलते हैं इशारे

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अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रदेश सरकार ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को खुला हाथ दे रखा है। राज्य में 34 सरकारी विभाग ऐसे हैं, जिनमें कोई न कोई अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते हुए पकड़ा जा रहा है।

इसके भी आगे बढ़कर पुलिस व राजस्व विभाग में सबसे अधिक भ्रष्टाचार सामने आया है, जहां सबसे अधिक भ्रष्टाचार है। इन दोनों विभागों में इस साल 79 अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े जा चुके हैं।

पुलिस विभाग में 43 और राजस्व विभाग में 36 ट्रैप हुए हैं। एक साल पहले तक हर तीसरे दिन एक अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाता था, मगर इस साल यह औसत दो दिन में पहुंच गया है।

सरकारी विभागों में रिश्वतखोरों पर कार्रवाई बढ़ने से भ्रष्टाचारियों ने रिश्वत लेना कम नहीं किया, बल्कि उसका तरीका बदल दिया है। अब मुंह से बोलने की बजाय इशारों से रिश्वत मांगी जा रही है, जिसे ट्रैप करने के लिए पुलिस आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रही है।

एंटी करप्शन ब्यूरो ने वर्ष 2026 में अब तक 176 ट्रैप ऑपरेशन किए हैं। कुल ट्रैप कार्रवाई में पुलिस व राजस्व विभाग की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है। यह दोनों विभाग ऐसे हैं, जहां बिना पैसे के काम कराना आसान नहीं है। एंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक अरशिंदर सिंह चावला ने इन सरकारी विभागों को भ्रष्टाचार की दलदल से बाहर निकालने का बीड़ा उठाया है।

सीएम ने दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हरियाणा सरकार खासकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की तरफ से आज तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि किसी भ्रष्टाचारी पर कोई नरमी बरतनी है। उन्होंने हर बार भ्रष्टाचारियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जिससे ब्यूरो को बिना किसी दबाव के काम करने का माहौल मिला है।

अरशिंदर चावला के अनुसार, पिछले कई वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर भी पुलिस और राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायतें सबसे अधिक सामने आती रही हैं। इन विभागों में आम लोगों का रोजाना काम पड़ता है। इसी वजह से यहां रिश्वतखोरी की शिकायतों की संख्या अधिक है।

वर्ष 2026 में ट्रैप ऑपरेशन का आंकड़ा पिछले करीब एक दशक के मुकाबले सबसे अधिक स्तर पर पहुंचा है। सरकारी छुट्टियों को अलग कर देखें तो औसतन हर दूसरे दिन एक सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़ा जा रहा है। यह केवल एसीबी की कार्रवाई का आंकड़ा नहीं है, बल्कि इस बात का संकेत भी है कि लोग अब भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने के लिए आगे आ रहे हैं।

रिश्वत मांगने का तरीका भी बदल रहा
एंटी करप्शन ब्यूरो के डीजीपी ने बताया कि भ्रष्टाचार के मामलों में रिश्वत मांगने का तरीका भी बदल रहा है। अब कई मामलों में सीधे रकम मांगने की बजाय इशारों और दूसरे माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे मामलों में ठोस सबूत जुटाना बड़ी चुनौती है। इसलिए एसीबी तकनीकी साक्ष्यों, ऑडियो-वीडियो रिकाॅर्डिंग और आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल पर जोर दे रही है।

शिकायतकर्ताओं की ओर से उपलब्ध कराई गई रिकाॅर्डिंग को साक्ष्य के रूप में मजबूत बनाने के लिए फारेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) के साथ समन्वय बढ़ाया गया है। हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्राथमिक स्रोत से प्राप्त रिकार्डिंग को सत्यापन के लिए जमा कराने की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है, जो पहले किसी चिप और पेन ड्राइव में देने पड़ते थे।

शिकायतकर्ताओं को इनाम, पहचान भी सुरक्षित
अरशिंदर चावला के अनुसार, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में आम लोगों की भागीदारी सबसे जरूरी है। कई लोग रिश्वतखोरी की जानकारी होने के बावजूद इसलिए शिकायत नहीं करते कि उनका नाम सामने आ जाएगा या उन्हें परेशान किया जाएगा। एसीबी शिकायतकर्ताओं की पहचान सुरक्षित रखने और शिकायत प्रक्रिया को आसान बनाने पर काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि जिन शिकायतकर्ताओं की गवाही और सहयोग से भ्रष्ट अधिकारियों को अदालत से सजा दिलाने में सफलता मिली है, उन्हें सम्मानित किया जा रहा है। वर्ष 2021 से अब तक ऐसे मामलों में फैसला आने के बाद शिकायतकर्ताओं को नकद पुरस्कार और प्रमाणपत्र भी दिए गए हैं।

सम्मानित किए जाने वालों के फोटो ब्यूरो की वेबसाइट पर लगाने की दिशा में ही सरकार विचार कर रही है। उन्होंने लोगों से कहा है कि रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ हिम्मत से आगे आकर एसीबी का सहयोग करें। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही इसे प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।

 

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