कांग्रेस ने वाराणसी ज‍िलाध‍िकारी से पूछा – क्‍या सर्क‍िट हाउस में हम सब मीट‍िंंग कर सकते हैं?

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जागरण संवाददाता, वाराणसी। प्रदेश में अब व‍िधानसभा चुनाव की आहट के बीच वाराणसी में सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर कांग्रेस हमलावर है। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया है क‍ि भाजपा कचहरी स्थित सर्किट हाउस सभागार में उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं मंत्री रविंद्र जायसवाल द्वारा संगठनात्मक बैठक कर चुनाव की तैयारियां करा रहे हैं। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने इस पर सवाल खड़े किए हैं।

इस बाबत उन्होंने जिलाधिकारी को संदेश भेजकर पूछा है कि मंत्री होने का अर्थ यह नहीं है कि सत्ता का दुरुपयोग करते हुए सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल राजनीतिक दल की संगठनात्मक बैठकों के लिए किया जाए। चौबे ने कहा कि सर्किट हाउस एक सरकारी संपत्ति है, जिसका निर्माण एवं संचालन जनता के धन से होता है। ऐसे में किसी राजनीतिक दल द्वारा अपने संगठनात्मक एवं चुनावी उद्देश्यों के लिए सरकारी सभागार का इस्तेमाल किया जाना उचित नहीं है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं मंत्री रविंद्र जायसवाल सर्किट हाउस में अपनी पार्टी की संगठनात्मक बैठक कर चुनाव की तैयारी करा सकते हैं, तो विपक्ष के नेताओं को भी उसी स्थान पर संगठनात्मक बैठक करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है? इस संदर्भ ने उन्‍होंने सोशल मीड‍िया के पोस्‍ट भी साझा क‍िए हैं।

उन्होंने कहा कि यदि सत्तापक्ष के लोग सर्किट हाउस का इस्तेमाल दलगत बैठक के लिए करेंगे, तो कांग्रेस के लोग भी वहां संगठनात्मक बैठक करेंगे। सरकारी संपत्ति किसी एक राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं है। यदि सत्ता पक्ष को सरकारी सभागार में राजनीतिक बैठक करने की अनुमति मिल रही है, तो कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों को भी समान अधिकार मिलना चाहिए।

महानगर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मंत्री होने के नाते रविंद्र जायसवाल को सत्ता का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के चुनावी हितों को साधने के लिए नहीं होना चाहिए। यदि सत्तापक्ष के लोग सरकारी परिसर में अपने दल की बैठकें करेंगे, तो कांग्रेस के लोग भी उसी स्थान पर बैठक करेंगे। लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार होना आवश्यक है।

राघवेंद्र चौबे ने जिलाधिकारी महोदय को व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से यह सवाल उठाते हुए अवगत कराया कि सर्किट हाउस में दलगत बैठक के आयोजन को लेकर प्रशासन को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। यदि सत्तापक्ष के मंत्री एवं विधायक वहां संगठनात्मक बैठक कर सकते हैं, तो विपक्ष के नेताओं को भी बैठक करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

 

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