केरलम सरकार ने RTI के दायरे से बाहर किए दो विभाग, BJP ने लगाया भ्रष्टाचार को छिपाने का आरोप

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 केरलम सरकार ने विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) के दो अहम और गोपनीय विभागों को ‘सूचना का अधिकार’ (RTI) कानून के दायरे से फिर से बाहर कर दिया है।

2022 में एक फैसला के तहत इन विभागों को पारदर्शिता कानून (RTI) के दायरे में लाया गया था, लेकिन अब एक बार फिर 22 अक्टूबर को जारी एक सरकारी अधिसूचना के जरिए T1 और T2 विभागों को RTI से छूट दी गई है।

T1 और T2 विभागों के पास कौन सी जानकारी?
सरकार ने इन विभागों को दायरे से हटाने के लिए RTI कानून, 2005 की धारा 24(4) का इस्तेमाल किया है, जो राज्य सरकारों को यह अधिकार देती है कि वे आधिकारिक गजट अधिसूचना के जरिए कुछ खास खुफिया और सुरक्षा संगठनों को इस कानून के दायरे से बाहर रख सकती हैं।

सरकार के इन विभागों के पास विजिलेंस कर्मियों और जांच से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां होती हैं।

  • T1 विभाग, विजिलेंस विभाग के प्रशासनिक, कार्यकारी और कानूनी कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) रखता है। साथ ही, यह विभाग उच्च सुरक्षा महत्व वाली कर्मियों की फाइलों और अत्यंत गोपनीय दस्तावेजों को भी संभालता है।
  • वहीं, T2 विभाग विजिलेंस अधिकारियों की साप्ताहिक डायरियों और महत्वपूर्ण सूचना स्रोतों की रिपोर्टों को संभालता है।

BJP ने केरलम सरकार पर लगाया आरोप

केरलम सरकार के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि इस कदम का मकसद भ्रष्टाचार के मामलों का सामना कर रहे लोगों को बचाना है, क्योंकि इन दोनों विभागों के पास मुख्यमंत्री, मंत्रियों, राजनीतिक नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े मामलों की फाइलें भी होती हैं
इससे पहले 2006 में एक सरकारी अधिसूचना के जरिए इन दोनों विभागों को RTI कानून से छूट दी गई थी। उस समय राज्य के आठ खुफिया और सुरक्षा संगठनों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया था। 2006 के बाद 2022 में इन विभागों को RTI कानून के दायरे में लाया गया था।

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