मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाने वाले भगवान श्रीराम हिंदू धर्म के अत्यंत पूजनीय देवताओं में शामिल है। भगवान विष्णु के सातवें अवतार जिनके नैतिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का उल्लेख महाकाव्य रामायण में देखने को मिलता है। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में इक्ष्वाकु वंश के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के सबसे बड़े बेटे के रूप में उन्होंने जन्म लिया था। भगवान विष्णु ने मनुष्य रूपी श्रीराम का अवतार धरती पर संतुलन बनाने और धर्म को बनाए रखने के लिए लिया था।
उन्होंने कभी भी झूठ नहीं बोला। हमेशा सच के साथ खड़े रहे। परिस्थिति चाहे कैसी भी क्यों न रहे उन्होंने हमेशा सत्य ही कहा।
2. प्रभु श्रीराम ने कभी भी गलत शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। युद्ध के मैदान में भी उन्होंने सभी के साथ सम्मानजनक तरीके से व्यवहार किया।
3. भगवान राम ने अपने आसपास के लोगों को कभी भी यह एहसास नहीं दिलाया कि वह महान हैं। उन्होंने हमेशा खुद से बात करने की पहल की, वह खुद मुस्कुराए और रिश्तों को सम्मानीय बनाया।
4. प्रभु श्रीराम परिश्रम पर भरोसा करते थे। उनका मानना था कि जो व्यक्ति कर्म करता है, उसे अवश्य फल मिलता है। वहीं जो सिर्फ किस्मत के भरोसे बैठा रहता है, उसे बाद में पछताना ही पड़ता है।
5. प्रभु श्रीराम स्वभाव से इतने सरल और निर्मल थे कि उन्हें कभी याद नहीं रहता था कि उन्होंने दूसरों को क्या दिया है। उनका यह गुण आज के लोगों को अपने जीवन में जरूर शामिल करना चाहिए, क्योंकि जब हम किसी को कुछ दें तो अपने आपको मान नहीं समझे।
राम जी ने कभी भी अपनी महानता के बारे में नहीं सोचा।
7. प्रभु श्रीराम का व्यक्तित्व इतना महान था कि, उनका बुरा चाहने वाले लोगों के लिए मन में कोई द्वेष नहीं लाते थे, बल्कि उनका अच्छा काम ही याद करते और उसके बारे में लोगों को बताते थे।
8. अगर कोई उनके पास उनकी बुराई करने आता है, तो वे समझ जाते थे कि वह व्यक्ति उनसे क्यों निराश है और उसे इस तरह जवाब देते थे कि गलतफहमी दूर हो जाती थी।
9. उन्हें दूसरों की सेवा करने में बड़ा ही आनंद आता था, और ये जताना अच्छा भी नहीं लगता था।
10 उन्होंनें अपने से बड़ों और छोटे सभी का सम्मान किया था, उनकी नजर में कोई गलत भी होता था, तो वह उसे समझाने का प्रयास करते थे।
11. उन्होंने पैसे कभी बर्बाद नहीं किए। बल्कि उन्हें इस तरह खर्च किया कि वे सबके काम आएं।
12. उन्होंने प्रत्येक स्त्री को माता या बहन कहा, ताकि एक पवित्र रिश्ता कायम रहे।
13. वह न केवल अपने लोगों के लिए बल्कि धरती पर मौजूद हर प्राणी के लिए शुभचिंतक थे।
14. उन्होंने अपने जीवन में कभी भी सीता के अलावा किसी अन्य महिला के बारे में नहीं सोचा।
15. उनका लुक हमेशा अच्छा रहता था। यानी, वह दूसरों के सामने खुद को अच्छे से पेश करते थे।
16. उनके जीवन का सिद्धांत था कि जो कोई भी उनके चरणों में समर्पित हो, उसे बचाया जाए। चाहे उस व्यक्ति ने उन्हें कितना भी नुकसान क्यों न पहुंचाया हो।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

