असम, बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में हुए उपचुनावों के नतीजे शुक्रवार को घोषित हुए। असम की नगांव लोकसभा सीट और बंगाल की नंदीग्राम व रेजीनगर विधानसभा सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। वहीं, तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम सीटों पर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके विजयी रही। पुडुचेरी में राजग समर्थित आल इंडिया एनआर कांग्रेस (एआइएनआरसी) ने बाजी मारी।
बंगाल की नंदीग्राम सीट पर भाजपा उम्मीदवार हासिरानी रथ ने कांग्रेस प्रत्याशी को 1,22,753 मतों से पराजित किया। वहीं, मुस्लिम बहुल रेजीनगर सीट पर भाजपा के शाखारभ सरकार ने 75,748 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
रेजीनगर सीट पर करीब 74 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। ऐसे में यहां भाजपा की जीत राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रेजीनगर में मतगणना संबंधी गड़बड़ी के आरोप लगाए। चुनाव आयोग ने बूथ संख्या 109 के आंकड़ों का हवाला देते हुए इन दावों को खारिज कर दिया।
तमिलनाडु में टीवीके उम्मीदवार मरगथम कुमारवेल और पी. सत्याबामा ने क्रमशः मदुरांतकम और धारापुरम सीटों पर जीत हासिल की। इन परिणामों से विजय की पार्टी को राजनीतिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पुडुचेरी की थट्टांचावडी सीट पर एआइएनआरसी के अशोक आनंद ने कांग्रेस उम्मीदवार ई. विनायगम को 8,482 मतों से हराया। उन्हें 13,358 वोट मिले, जबकि द्रमुक तीसरे स्थान पर रही।
दिल्ली में आक्रामक विपक्ष को उपचुनावों ने दिखाया आईना
जीत के लिए सिर्फ हंगामा नहीं, वोटरों का विश्वास भी चाहिएअरविंद शर्मा, जागरणनई दिल्लीः चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर व्यापक अभियान चलाने एवं सड़कों पर विरोध जताने वाले विपक्षी दलों को छह सीटों के उपचुनाव के नतीजे आत्ममंथन के लिए प्रेरित करते हैं।
उत्तर प्रदेश और पंजाब में विधानसभा चुनाव सामने हैं। ऐसे में विपक्ष के सामने दोहरी चुनौती है। उसे समझना होगा कि संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ शोर मचाने से अधिक जरूरी जनता के बीच जाकर विश्वास अर्जित करना है। विपक्ष इसे अगर नहीं समझता है तो आगामी चुनावों में भी उसके आंदोलनों एवं चुनावी नतीजों के बीच फासला बना रह सकता है।
बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर भाजपा की बड़ी जीत तथा असम की नगांव संसदीय सीट पर उसकी सफलता इसलिए महत्वपूर्ण है कि इन दोनों राज्यों में हाल के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा सत्ता में है। इन नतीजों से उसे अपने जनाधार और राज्य सरकार के प्रति समर्थन का दावा मजबूत करने का अवसर मिला है। पुडुचेरी की थट्टानचावडी सीट पर भाजपा के सहयोगी दल की जीत ने भी सत्तारूढ़ गठबंधन को राहत दी है।
दूसरी ओर, तमिलनाडु की धारापुरम और मदुरंतकम सीटों पर राज्य में सत्तारुढ़ पार्टी टीवीके की जीत को भाजपा के विरुद्ध जनादेश नहीं माना जा सकता। राज्य में भाजपा का जनाधार नहीं है। यहां वह सीधे मुकाबले में भी नहीं थी। इन नतीजों को देशव्यापी सियासी रुझान नहीं माना जा सकता, लेकिन विपक्ष की रणनीति पर सवाल जरूर उठते हैं।
चुनाव आयोग के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर एक होकर आंदोलन चलाने वाले विपक्षी दल क्या चुनाव वाले राज्यों में भी एकता दिखाई। असम एवं बंगाल में विपक्षी दलों में कोई तालमेल नहीं दिखा। विपक्ष को चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखने के साथ बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और विकास जैसे मुद्दों पर भी जनता के बीच जाना चाहिए था। केवल साझा विरोध से विपक्षी एकता नहीं बनती और न ही सत्ता विरोधी नाराजगी अपने आप वोट में तब्दील होती है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

