दिव्यांग लोगों की मदद के लिए सर्विस डॉग्स (सेवा देने वाले कुत्तों) के इस्तेमाल के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अंतिम रूप देने का दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति दिनेश मेहता व न्यायमूर्ति अदिति चौधरी की पीठ ने कहा कि अदालत को उम्मीद है कि अधिकारी इस मामले में सात जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई तक एसओपी को अंतिम रूप दे देंगे।
एसओपी को अंतिम रूप देने का निर्देश
अदालत ने उक्त निर्देश धनंजय संजोगता फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में दिव्यांग लोगों द्वारा थेरेपी या सर्विस जानवरों के इस्तेमाल के लिए एसओपी न होने का मुद्दा उठाया गया था।
सर्विस डॉग्स के रजिस्ट्रेशन का सुझाव
सुनवाई के दौरान पशुपालन और डेयरी विभाग व दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के वकील ने कोर्ट के सामने भारत में दिव्यांग लोगों की मदद के लिए सर्विस डॉग्स पर एक ड्राफ्ट एसओपी पेश किया।
उन्होंने बताया कि जनता और सभी संबंधित पक्षों से आपत्तियां मांगी गई हैं और एसओपी को जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा। एसओपी में शामिल करने के लिए सर्विस डॉग्स का एक रजिस्टर रखने और हर सर्विस डॉग को एक रजिस्ट्रेशन नंबर दिए जाने का सुझाव दिया गया।
यह भी सुझाव दिया गया कि सभी सर्विस डॉग्स के लिए एक खास रंग का यूनिक कॉलर (गले का पट्टा) तय किया जाए, ताकि सुरक्षा कर्मियों सहित आम लोगों को पता चल सके कि यह एक सर्विस डॉग है और इससे किसी को नुकसान नहीं होगा।
आवारा जानवरों के हमलों का मुद्दा
केंद्र सरकार ने पीठ को भरोसा जताया कि इन सुझावों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा ताकि वे उन पर विचार कर एसओपी में शामिल किया जा सके।
2024 में एक संस्था द्वारा दायर जनहित याचिका में एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स-2023 को चुनौती दी गई थी। इसमें कहा गया था कि यह राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज अधिनियम 2016 का उल्लंघन करते हैं, क्योंकि इनमें दिव्यांग लोगों पर आवारा जानवरों के हमलों की समस्या का समाधान नहीं किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि दृष्टिबाधित लोग खतरों का अंदाजा नहीं लगा पाते और उनकी आवाजाही सीमित होती है।
इसमें यह भी जोड़ा गया कि दूसरी जगहों पर कई दिव्यांग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के लिए सर्विस और थेरेपी जानवरों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन भारत में दिव्यांगों के लिए सर्विस या थेरेपी जानवरों के इस्तेमाल का कोई सिस्टम नहीं है।
क्या होता है सर्विस डॉग?
सर्विस डॉग (Service Dog) एक विशेष रूप से प्रशिक्षित सहायक कुत्ता होता है, जिसे किसी विकलांग या विशेष आवश्यकता वाले व्यक्ति की मदद करने के लिए तैयार किया जाता है।
ये सामान्य पालतू कुत्तों से बिल्कुल अलग होते हैं, क्योंकि इन्हें अपने मालिक (हैंडलर) की बीमारी या शारीरिक/मानसिक अक्षमता से जुड़े विशिष्ट कार्यों को पूरा करने की कड़े स्तर की ट्रेनिंग दी जाती है।
कानूनी और चिकित्सा की दृष्टि में इन्हें महज एक जानवर नहीं, बल्कि एक जरूरी चिकित्सा उपकरण (Medical Equipment) या सहायक माना जाता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

