बच्चों की परवरिश में माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। हर बच्चा डांट या सख्ती पर अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है। वहीं न्यूमरोलॉजी में जन्मतिथि के आधार पर लोगों के स्वभाव और व्यक्तित्व से जुड़ी कुछ मान्यताएं बताई जाती हैं। इसी आधार पर कुछ मूलांकों वाले बच्चों को भावनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील माना जाता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि न्यूमरोलॉजी एक विश्वास-आधारित पद्धति है और बच्चों के व्यवहार पर इसके दावों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जाता।
मूलांक 2 के बच्चों को लेकर मान्यता
न्यूमरोलॉजी में मूलांक 2 को चंद्रमा से जोड़ा जाता है। इस मान्यता के अनुसार इस मूलांक वाले बच्चों का स्वभाव भावुक और संवेदनशील हो सकता है। ऐसे बच्चों पर माता-पिता की नाराजगी या कड़े शब्दों का असर अपेक्षाकृत अधिक होने की बात कही जाती है।
मान्यता के अनुसार, बार-बार डांटने के बजाय बच्चों से प्यार और समझदारी के साथ बात करना उनके लिए बेहतर माना जाता है।
मूलांक 7 के बच्चों के बारे में क्या कहा जाता है?
न्यूमरोलॉजी में मूलांक 7 को भी संवेदनशील और अंतर्मुखी स्वभाव से जोड़कर देखा जाता है। इस मान्यता के अनुसार ऐसे बच्चे अपनी भावनाओं को आसानी से व्यक्त नहीं करते और माता-पिता की डांट को मन में रख सकते हैं।
हालांकि, किसी बच्चे का वास्तविक स्वभाव केवल उसके मूलांक से तय नहीं होता। परिवार का माहौल, उम्र, अनुभव, व्यक्तित्व और माता-पिता का व्यवहार भी बच्चे की भावनात्मक प्रतिक्रिया को प्रभावित करते हैं।
बच्चों को समझने में संवाद जरूरी
बच्चे की गलती पर डांटने के बजाय उसे यह समझाना अधिक उपयोगी हो सकता है कि गलती क्या हुई और अगली बार उसे कैसे सुधारा जा सकता है। प्यार, स्पष्ट सीमाएं और खुला संवाद बच्चों के भावनात्मक विकास में मदद कर सकते हैं।
निष्कर्ष: मूलांक 2 और 7 के बच्चों को लेकर न्यूमरोलॉजी में संवेदनशीलता से जुड़ी मान्यताएं हैं, लेकिन इन्हें वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। हर बच्चे का व्यक्तित्व अलग होता है और उसे समझने के लिए उसके व्यवहार व परिस्थितियों को देखना जरूरी है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

